Mumbai News: भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने एक बहुत बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय नौसेना पाकिस्तान पर भीषण हमला करने वाली थी। यह हमला समुद्र के रास्ते से चंद मिनटों में ही होने वाला था। लेकिन खौफ में आकर पाकिस्तान ने सैन्य कार्रवाई रोकने की भीख मांग ली। नौसेना प्रमुख ने यह बातें मुंबई में आयोजित एक अलंकरण समारोह के दौरान कहीं। उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और वैश्विक हालात पर भी गहरी चिंता जताई है।
पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ था ‘ऑपरेशन सिंदूर’
पिछले साल पहलगाम में एक बड़ा आतंकी हमला हुआ था। इस कायराना हमले के जवाब में भारतीय नौसेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था। एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि नौसेना की टुकड़ियां तुरंत मोर्चे पर तैनात कर दी गई थीं। नौसेना ने पूरे अभियान के दौरान बेहद आक्रामक रुख बनाए रखा। यह अब कोई राज नहीं है कि नौसेना समुद्र से सीधा और सटीक हमला करने वाली थी। लेकिन ऐन वक्त पर पाकिस्तान ने कार्रवाई रोकने का गिड़गिड़ाते हुए अनुरोध कर दिया।
वीर नौसेना अधिकारियों को मिला युद्ध सेवा पदक
मुंबई में नौसेना अलंकरण समारोह का भव्य आयोजन किया गया था। इस समारोह में नौसेना प्रमुख ने वीर जवानों को सम्मानित किया। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दो शीर्ष अधिकारियों को मेडल मिला। उन्हें उनकी विशिष्ट सेवा के लिए सर्वोच्च युद्ध सेवा पदक से नवाजा गया। इस त्वरित और दृढ़ कार्रवाई ने नौसेना की अदम्य क्षमताओं को साबित किया है। इससे राष्ट्र का विश्वास भारतीय नौसेना पर और भी ज्यादा मजबूत हो गया है।
नौसेना ने प्रधानमंत्री के सामने दिखाया अपना पराक्रम
एडमिरल त्रिपाठी ने नौसेना की लगातार बढ़ती ताकत का भी खास जिक्र किया। उन्होंने बताया कि नौसेना पूरे साल पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है। पश्चिमी तट पर प्रधानमंत्री ने 17 घंटे की ऐतिहासिक रात्रिकालीन समुद्री यात्रा की थी। इस दौरान भारतीय नौसेना ने उनके सामने अपनी शानदार परिचालन क्षमताओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था। नौसेना प्रमुख ने कहा कि यह सेना और पूरे देश के लिए बहुत ही गर्व का क्षण था।
पश्चिम एशिया के तनाव से होर्मुज में फंसे जहाज
नौसेना प्रमुख ने पश्चिम एशिया के भीषण युद्ध पर भी अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच भयंकर युद्ध चल रहा है। इस संघर्ष में अब तक 20 से अधिक वाणिज्यिक जहाजों पर खतरनाक हमले हो चुके हैं। हालात इतने खराब हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास लगभग 1900 जहाज फंसे हुए हैं। पहले यहां से रोजाना औसतन 130 जहाज गुजरते थे। अब युद्ध के कारण यह संख्या घटकर सिर्फ छह या सात ही रह गई है।


