Kolkata News: पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश करने की तैयारी में है। राज्य मंत्रिमंडल के सूत्रों के अनुसार, इसे सोमवार को विधानसभा में रखा जा सकता है। यह कदम भाजपा द्वारा अपने चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों के अनुरूप उठाया जा रहा है।
हाल ही में विधानसभा की कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा की गई और इसे अंतिम रूप दिया गया है। भाजपा इस कानून को एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देख रही है। पार्टी ने सत्ता में आने के छह महीने के भीतर यूसीसी लागू करने का स्पष्ट वादा किया था, जिसे अब पूरा किया जा रहा है।
अन्य राज्यों की तर्ज पर बंगाल में सुधार
उत्तराखंड समान नागरिक संहिता को आधिकारिक रूप से लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना था। उत्तराखंड की सफलता के बाद, अब गुजरात, असम, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं। पश्चिम बंगाल सरकार अब इन्हीं राज्यों की तर्ज पर अपने राज्य में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने की योजना बना रही है।
महाराष्ट्र सरकार ने भी हाल ही में यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने सदन को बताया कि सरकार इस कानून को प्रभावी बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वे दमनकारी सामाजिक प्रथाओं को खत्म करने और महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दे रहे हैं।
देश भर में समान कानून की प्रतिबद्धता
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मार्च में इस बात पर जोर दिया था कि समान नागरिक संहिता भाजपा का दीर्घकालिक संकल्प रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार के नेतृत्व में देश तुष्टीकरण की राजनीति से ऊपर उठकर समान कानूनों के माध्यम से चलेगा। उत्तराखंड और गुजरात की तर्ज पर अन्य राज्य भी इसे एक ऐतिहासिक सुधार मान रहे हैं।
यह कानून न केवल सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा बदलाव हो सकता है, बल्कि राज्य में कानूनी नीतियों को भी एक नई दिशा देगा। विधानसभा में इस विधेयक के पेश होने से पहले राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। भाजपा इसे अपने मुख्य चुनावी एजेंडे की पूर्ति के तौर पर पेश कर रही है, ताकि प्रशासन को बेहतर बनाया जा सके।

