West Bengal News: पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद गहराया संवैधानिक गतिरोध अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। राज्यपाल आर.एन. रवि ने अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य विधानसभा को भंग करने का आदेश जारी कर दिया है। यह आदेश 7 मई, 2026 से प्रभावी माना जाएगा। विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के बावजूद ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया था। इसके बाद राज्यपाल ने अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत यह कड़ा कदम उठाया है।
चुनाव नतीजों ने बिगाड़ा समीकरण
हालिया विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 207 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया है। वहीं, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस महज 80 सीटों पर सिमट गई है। खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने गृह क्षेत्र भवानीपुर से शुभेंदु अधिकारी के हाथों 15 हजार से अधिक वोटों से हार गईं। हार के बाद भी ममता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह इस्तीफा नहीं देंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें जनमत से नहीं बल्कि गहरी साजिश के जरिए हराया गया है।
संवैधानिक संकट और विशेषज्ञों की राय
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी के अनुसार, जब कोई मुख्यमंत्री बहुमत खोने के बाद भी इस्तीफा न दे, तो राज्यपाल अनुच्छेद 356 का उपयोग कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना सबसे संभावित परिणाम होता है। संविधान के अनुच्छेद 172 के मुताबिक, पांच साल की अवधि समाप्त होते ही विधानसभा स्वतः भंग हो जाती है। चूंकि वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है, इसलिए ममता बनर्जी इसके बाद कानूनी तौर पर मुख्यमंत्री नहीं रह सकेंगी।
ममता बनर्जी का प्रतीकात्मक विरोध
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी का इस्तीफा न देना उनकी पुरानी आंदोलनकारी राजनीति का हिस्सा है। वे इसके जरिए यह संदेश देना चाहती हैं कि चुनाव निष्पक्ष नहीं हुए और वे अकेले चुनाव आयोग से लड़ रही हैं। विशेषज्ञ सायंतन घोष कहते हैं कि ममता इस हार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दे सकती हैं। हालांकि, संवैधानिक तौर पर इसका कोई खास महत्व नहीं है क्योंकि नई सरकार के शपथ लेते ही पुरानी व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो जाती है।
बीजेपी ने बताया ‘संवैधानिक ईशनिंदा’
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने ममता के इस रुख को ‘संवैधानिक ईशनिंदा’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह लंबे समय से चली आ रही लोकतांत्रिक परंपराओं पर सीधा हमला है। दूसरी ओर, संजय राउत और अखिलेश यादव जैसे विपक्षी नेताओं ने ममता का समर्थन किया है। अखिलेश यादव ने कोलकाता जाकर ममता से मुलाकात की और चुनाव में बेईमानी होने का आरोप लगाया। बीजेपी अब शनिवार को अपनी नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह की तैयारी कर रही है।
क्या राज्यपाल हटा सकते हैं मुख्यमंत्री?
संविधान का अनुच्छेद 164(1) कहता है कि मंत्री राज्यपाल की इच्छा तक पद पर बने रहेंगे। हालांकि, इसका अर्थ यह है कि जब तक मंत्रिपरिषद को सदन का विश्वास हासिल है, वे पद पर रहते हैं। लीगल स्कॉलर फैजान मुस्तफा बताते हैं कि विधानसभा भंग होने के बाद सरकार का अस्तित्व स्वतः समाप्त हो जाता है। अब 7 मई के बाद राज्यपाल नई विधानसभा के गठन की प्रक्रिया शुरू करेंगे। नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी और इसके बाद ही नई कैबिनेट का गठन संभव होगा।

