Kanpur News: अपनी जिंदगी में उजाले की एक किरण तलाशते हुए कानपुर से पैदल लखनऊ पहुंची 19 वर्षीय दिव्यांग खुशी गुप्ता की कहानी अब उम्मीद और सुशासन की मिसाल बन चुकी है। जिस बेटी के सामने कभी सुनने-बोलने की बड़ी चुनौती थी, आज उसके पूरे परिवार के चेहरे पर सुकून की मुस्कान है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हुई मुलाकात के बाद शुरू हुई सहायता केवल आश्वासनों तक सीमित नहीं रही। शासन ने एक-एक कर खुशी और उसके परिवार की हर बड़ी चिंता का स्थाई समाधान कर दिया है। इसी क्रम में कलेक्ट्रेट परिसर में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने खुशी के पिता को नए ई-रिक्शा की चाबी सौंपी।
निःशुल्क ई-रिक्शा मिलने से परिवार को मिला सम्मानजनक आजीविका का साधन
जिलाधिकारी की विशेष पहल पर एनआरजे इलेक्ट्रिक मोटर व्हीकल प्राइवेट लिमिटेड ने अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड के तहत यह ई-रिक्शा पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया है। इस नए वाहन का आधिकारिक पंजीकरण खुशी की मां गीता गुप्ता के नाम पर कराया गया है, ताकि परिवार को स्थायी आजीविका मिल सके।
यह बड़ी सहायता ऐसे समय पर मिली है, जब यह गरीब परिवार आर्थिक संकट के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा था। खुशी के पिता कल्लू गुप्ता पिछले कई वर्षों से किराये का ई-रिक्शा चलाकर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। उनकी रोज की कमाई का एक बड़ा हिस्सा तो केवल वाहन के किराये में ही चला जाता था।
सड़क दुर्घटना के बाद जिलाधिकारी ने खुद आगे बढ़कर की बड़ी मदद
हाल ही में एक सड़क दुर्घटना में पैर में गंभीर चोट लगने के कारण कल्लू गुप्ता की आय का यह इकलौता साधन भी पूरी तरह प्रभावित हो गया था। जैसे ही यह संवेदनशील स्थिति जिलाधिकारी के संज्ञान में आई, उन्होंने तुरंत निजी कंपनी से समन्वय स्थापित कर परिवार को स्वयं का नया ई-रिक्शा उपलब्ध कराने की सराहनीय पहल की।
गौरतलब है कि खुशी की संघर्षगाथा पिछले वर्ष सामने आई थी, जब वह अपनी गंभीर समस्याएं लेकर कानपुर से पैदल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने लखनऊ पहुंची थी। मुख्यमंत्री ने उससे बेहद आत्मीयता से मुलाकात की थी और अधिकारियों को उसके त्वरित उपचार, उच्च शिक्षा और पुनर्वास के कड़े निर्देश दिए थे।
सफल कॉक्लियर इम्प्लांट के बाद अब खुशी ने बोलना भी किया शुरू
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद फरवरी 2026 में खुशी का सफल कॉक्लियर इम्प्लांट ऑपरेशन कराया गया। लंबे समय तक सुनने और बोलने में पूरी तरह असमर्थ रही खुशी अब पहले की तुलना में काफी बेहतर सुन और समझ पा रही है। नियमित स्पीच थेरेपी की मदद से अब उसने धीरे-धीरे बोलना भी शुरू कर दिया है।
उसकी शिक्षा बाधित न हो, इसके लिए दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा लखनऊ के मोहान रोड स्थित समेकित विशेष माध्यमिक (आवासीय) विद्यालय में कक्षा-9 में उसका दाखिला कराया गया है। शुक्रवार को नया ई-रिक्शा मिलने के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में कभी अपनी बात न कह पाने वाली खुशी ने मुस्कुराते हुए कहा- “थैंक यू योगी जी।”

