Delhi News: मध्य प्रदेश के धार जिले के ऐतिहासिक भोजशाला परिसर मामले में सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है। मुस्लिम पक्ष ने एमपी हाई कोर्ट के उस फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है, जिसमें भोजशाला को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित किया गया था।
वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी और वकील निजाम पाशा ने सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने मामले को रखा। वकीलों ने कोर्ट से याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई की गुजारिश की, जिसके बाद कोर्ट ने इसे जल्द लिस्ट करने का भरोसा दिया।
हाई कोर्ट ने रद्द किया था नमाज पढ़ने का अधिकार
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 15 मई को दिए अपने फैसले में धार के भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर बताया था। इसके साथ ही अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के दशकों पुराने उस आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसके तहत मुसलमानों को वहां शुक्रवार को नमाज पढ़ने की अनुमति थी।
हाई कोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया था कि इस 11वीं सदी के स्मारक का धार्मिक स्वरूप पूरी तरह से वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित है। यह इमारत मूल रूप से देवी वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर और संस्कृत अध्ययन का केंद्र है। अदालत ने कहा कि मुस्लिम पक्ष मस्जिद के लिए सरकार से संपर्क कर सकता है।
हिन्दू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की कैविएट
इस मामले में हिंदू समुदाय भोजशाला को सरस्वती मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद का दावा करता है। हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ जहां मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है, वहीं हिंदू पक्ष ने भी अदालत में कैविएट याचिका दायर कर दी है।
हिंदू पक्ष ने मांग की है कि इस मामले में उनका पक्ष सुने बिना कोई भी एकतरफा आदेश जारी न किया जाए। फिलहाल यह पूरा परिसर एएसआई के संरक्षण में है। हाई कोर्ट ने एएसआई को निर्देश दिया था कि वह लंदन के संग्रहालय से देवी सरस्वती की प्रतिमा वापस लाने के प्रयास करे।

