New Delhi News: सर्वोच्च अदालत ने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की चयन प्रक्रिया को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि कॉलेजियम के निर्णय सूचना के अधिकार (आरटीआई) और न्यायिक समीक्षा के दायरे से पूरी तरह बाहर रहेंगे।
जजों की चयन प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट का रुख स्पष्ट
सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की, जिसमें कॉलेजियम सिस्टम में पारदर्शिता की कमी का मुद्दा उठाया गया था। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि जजों की नियुक्ति के लिए की जाने वाली सिफारिशों की कोई न्यायिक समीक्षा नहीं की जा सकती है।
जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने दी अहम दलील
जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने कहा कि कॉलेजियम का फैसला उसकी अपनी समझ और संतुष्टि पर निर्भर करता है। इस प्रक्रिया में हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट किसी उम्मीदवार की सिफारिश को लेकर याचिकाएं स्वीकार नहीं कर सकते और न ही कोई निर्देश जारी कर सकते हैं।
कॉलेजियम के फैसलों में दखल देने से इनकार
शीर्ष अदालत की बेंच ने जोर देकर कहा कि हम कॉलेजियम के फैसलों में कोई हस्तक्षेप नहीं करेंगे। अदालत ने प्रक्रिया की गंभीरता को समझाते हुए बताया कि कुछ चुनिंदा उम्मीदवारों के नामों की फाइनल सिफारिश करने से पहले सैकड़ों योग्य उम्मीदवारों को बातचीत के लिए बुलाया जाता है।
जानिए आखिर क्या है यह कॉलेजियम सिस्टम
कॉलेजियम सिस्टम देश की एक विशेष कानूनी व्यवस्था है, जिसके जरिए सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न राज्यों के हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति, प्रमोशन और ट्रांसफर किए जाते हैं। इस पूरी व्यवस्था की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें जजों की नियुक्ति खुद सीनियर जज ही करते हैं।
सीजेआई और वरिष्ठ जज होते हैं इसमें शामिल
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की कमान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) के हाथों में होती है और इसमें अदालत के चार सबसे सीनियर जज शामिल होते हैं। वहीं राज्यों के हाई कोर्ट कॉलेजियम में संबंधित कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और दो सबसे सीनियर जज शामिल रहते हैं।
जानिए कैसे काम करती है जजों की नियुक्ति प्रक्रिया
यह कॉलेजियम सबसे पहले योग्य उम्मीदवारों के नामों की लिस्ट तैयार करके केंद्र सरकार के पास भेजता है। सरकार इन नामों की गहन जांच करती है। यदि सरकार को किसी नाम पर आपत्ति हो, तो वह फाइल को पुनर्विचार के लिए कॉलेजियम को वापस लौटा सकती है।
राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद फाइनल होती है नियुक्ति
अगर कॉलेजियम दोबारा उन्हीं नामों को सरकार के पास भेज देता है, तो सरकार के लिए उन्हें मंजूर करना अनिवार्य हो जाता है। इसके बाद अंतिम चरण में देश के राष्ट्रपति इन नामों पर अपने हस्ताक्षर करते हैं और फिर अदालतों में जजों की आधिकारिक नियुक्ति होती है।

