New Delhi News: मशहूर जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक इन दिनों देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे इस प्रदर्शन में वे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले अनशन कर रहे हैं।
कभी केंद्र सरकार की नीतियों के बड़े समर्थक रहे सोनम वांगचुक के इस बदले रुख ने सबको चौंका दिया है। 5 अगस्त 2019 को जब केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को समाप्त कर लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया था, तब वांगचुक ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री का धन्यवाद किया था।
छठी अनुसूची और राज्य के दर्जे पर यू-टर्न का आरोप
सोनम वांगचुक की नाराजगी मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के चुनावी वादों को लेकर है। उनका आरोप है कि भाजपा ने साल 2020 के अपने घोषणापत्र में लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष दर्जा देने का वादा किया था, लेकिन बाद में सरकार ने इस पर पूरी तरह से यू-टर्न ले लिया।
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिलाने की मांग को लेकर वांगचुक लंबे समय से आंदोलनरत हैं। साल 2025 में उन्होंने लद्दाख की स्वायत्तता के लिए 21 दिनों का अनशन किया था, जिसके बाद लेह में हिंसक प्रदर्शन हुए और भाजपा कार्यालय में आग लगा दी गई थी।
सरकार ने लगाया था भीड़ को भड़काने का गंभीर आरोप
केंद्र सरकार ने 25 सितंबर 2025 को बयान जारी कर वांगचुक पर हिंसक प्रदर्शनों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। सरकार के मुताबिक, वांगचुक ने अरब स्प्रिंग और नेपाल के प्रदर्शनों का भड़काऊ हवाला देकर भीड़ को उकसाया था। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में ले लिया गया था।
करीब 6 महीने की हिरासत के बाद मार्च 2026 में वांगचुक को रिहा किया गया। अब 28 जून से वे दिल्ली में दोबारा भूख हड़ताल पर हैं। इस बार वे लद्दाख के मुद्दों के साथ-साथ देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर अड़े हुए हैं।

