Punjab News: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान 5 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे राज्यसभा सांसदों के दल-बदल और लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन का मुद्दा उठाएंगे। मुख्यमंत्री मान ने स्पष्ट किया कि पंजाब की जनता के जनादेश की रक्षा करना उनका सर्वोच्च कर्तव्य है। राष्ट्रपति ने उन्हें दोपहर 12 बजे का समय दिया है। हालांकि उन्होंने अपने सभी विधायकों के लिए समय मांगा था, लेकिन राष्ट्रपति भवन ने केवल मुख्यमंत्री को ही बातचीत के लिए आमंत्रित किया है।
राष्ट्रपति के सामने गूंजेगी पंजाब की आवाज
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस मुलाकात की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भले ही केवल उन्हें आमंत्रित किया गया है, लेकिन वे अपने साथी विधायकों के साथ ही दिल्ली जाएंगे। विधायक राष्ट्रपति भवन के बाहर इंतजार करेंगे, जबकि मान अंदर जाकर पंजाब की समस्याओं और राजनीतिक घटनाक्रम को राष्ट्रपति के समक्ष रखेंगे। मान ने अपना कीमती समय देने के लिए राष्ट्रपति का हृदय से आभार व्यक्त किया है और बैठक के बाद अगली रणनीति बताने की बात कही है।
आम आदमी पार्टी में बड़ी टूट और भाजपा का दांव
राजनीतिक संकट तब गहराया जब 24 अप्रैल को आम आदमी पार्टी के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने अचानक इस्तीफा दे दिया। इन सांसदों ने पार्टी पर अपने मूल सिद्धांतों से भटकने का आरोप लगाया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय कर लिया। इस्तीफा देने वाले सांसदों में राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इनमें से छह सांसद सीधे तौर पर पंजाब का प्रतिनिधित्व करते हैं।
राज्यसभा में ‘आप’ की ताकत हुई बेहद कम
राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर इन सांसदों के भाजपा में विलय को मंजूरी दे दी। इस फैसले के बाद उच्च सदन में अरविंद केजरीवाल की पार्टी की ताकत सिमट कर केवल तीन रह गई है। सांसदों के इस सामूहिक दलबदल को ‘आप’ ने लोकतंत्र की हत्या और जनादेश का अपमान बताया है। भगवंत मान इस संवैधानिक संकट को राष्ट्रपति के सामने पेश कर भाजपा की रणनीतियों पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराएंगे।
विधायकों के साथ एकजुटता दिखाने की कोशिश
मुख्यमंत्री भगवंत मान की इस यात्रा को पार्टी के भीतर एकजुटता बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। अपने विधायकों को साथ ले जाकर वे यह संदेश देना चाहते हैं कि पंजाब सरकार सांसदों के जाने के बावजूद पूरी तरह संगठित है। मान ने कहा कि वह राष्ट्रपति भवन में पंजाब की आवाज को बहुत मजबूती के साथ उठाएंगे। विपक्षी दलों की नजर अब इस बैठक और उसके बाद मुख्यमंत्री द्वारा घोषित की जाने वाली भविष्य की रणनीति पर टिकी हुई है।
सिद्धांतों से भटकाव के लगे गंभीर आरोप
भाजपा में शामिल होने वाले सांसदों का दावा है कि आम आदमी पार्टी अब वह संगठन नहीं रही, जिसके लिए उन्होंने काम शुरू किया था। उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों और नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, पंजाब सरकार का मानना है कि यह सब केंद्रीय एजेंसियों और सत्ता के लालच का परिणाम है। 5 मई की बैठक के बाद पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। मुख्यमंत्री मान इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उछालकर सहानुभूति बटोरने की तैयारी में हैं।

