Uttar Pradesh News: दिल्ली से सटे नोएडा के सेक्टर-90 में एक बड़े रियल एस्टेट फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। सीबीएस इंटरनेशनल प्रोजेक्ट लिमिटेड के ‘नोएडा वर्ल्ड वन’ (अब अल्फाथंब) प्रोजेक्ट में बिल्डर ने खरीदारों को झांसा दिया। प्राधिकरण से मंजूरी न होने के बावजूद लोअर और अपर ग्राउंड फ्लोर पर करोड़ों रुपये की दुकानें बेच दी गईं।
हाई कोर्ट में एजीएम ने दाखिल किया हलफनामा
यह मामला अब इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंच चुका है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान नोएडा प्राधिकरण की सहायक महाप्रबंधक (एजीएम) प्रिया सिंह की ओर से एक काउंटर एफिडेविट जमा किया गया है। इस सरकारी हलफनामे में स्पष्ट किया गया है कि परियोजना का नक्शा केवल भूतल (ग्राउंड फ्लोर) और प्रथम तल से ही स्वीकृत है।
बदला गया नक्शा और खरीदारों को मिला धोखा
नोएडा प्राधिकरण ने साल 2014 में सीबीएस इंटरनेशनल को आईटी सेक्टर के तहत भूखंड संख्या-1 आवंटित किया था। यहां पहले 23 मंजिला इमारत की ही मंजूरी दी गई थी। बिल्डर ने नियमों को ताक पर रखकर खरीदारों को एक फर्जी नक्शा दिखाया और लोअर व अपर ग्राउंड फ्लोर के नाम पर बुकिंग कर ली।
जब पजेशन देने का समय आया, तो खरीदारों को तय फ्लोर के बजाय किसी अन्य मंजिल पर दुकानें सौंप दी गईं। खरीदारों ने जब इस हेरफेर पर कड़ी आपत्ति जताई, तो बिल्डर और प्राधिकरण के अधिकारियों ने उनकी बात नहीं सुनी। परेशान होकर पीड़ितों ने न्याय के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
को-डेवलपर की एंट्री और नियमों का उल्लंघन
साल 2017 में इस विवादित परियोजना में एक को-डेवलपर की एंट्री हुई, जिसके बाद प्रोजेक्ट का नाम बदलकर ‘अल्फाथंब’ कर दिया गया। संशोधित प्लान के तहत प्राधिकरण ने 26 मंजिला इमारत को मंजूरी दी थी। इसके विपरीत मौके पर नियमों का उल्लंघन करके 29 मंजिला अवैध निर्माण किया जा रहा है।
इस गंभीर मामले में नोएडा प्राधिकरण की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। कई नोटिस जारी करने के बावजूद अंत में प्राधिकरण ने ओसीसीसी जारी कर रजिस्ट्री की इजाजत दे दी। इस पूरे विवाद पर सीबीएस इंटरनेशनल प्रोजेक्ट लिमिटेड के निदेशक ईशान रस्तोगी ने फिलहाल पूरी तरह चुप्पी साध रखी है।
Author: Ajay Mishra

