रुपये की ऐतिहासिक गिरावट और भारतीय बाजार का ओवरवैल्यूएशन: क्या है इस आर्थिक संकट की असली सच्चाई?

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Delhi News: भारतीय रुपया इन दिनों भारी दबाव में है। साल 2025 की शुरुआत में जो विनिमय दर 85.8 रुपये प्रति डॉलर थी, वह अब 97 रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गई है। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण भारतीय शेयर बाजारों का ‘ओवरवैल्यूड’ होना है। वैश्विक निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालकर उन देशों का रुख कर रहे हैं जहां निवेश सस्ता और सुरक्षित है।

आंकड़ों के अनुसार, पिछले 18 महीनों में भारतीय शेयर बाजारों से 53 अरब डॉलर की भारी निकासी हुई है। हालांकि, बाजार पूरी तरह नहीं गिरा है, जिसका श्रेय भारत के मिडिल क्लास को जाता है। SIP के जरिए हर महीने होने वाला नियमित घरेलू निवेश, विदेशी बिकवाली के सामने एक ढाल बनकर खड़ा है।

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बाजार का महंगा मूल्यांकन और निवेशकों का पलायन

भारतीय बाजार का P/E अनुपात अन्य उभरते बाजारों की तुलना में बहुत अधिक है। जहां उभरते बाजारों का औसत P/E 15-16 है, वहीं भारत का अनुपात 22.5 के आसपास चल रहा है। चीन, कोरिया और ब्राजील जैसे देशों की तुलना में भारत के शेयर 40 से 150 प्रतिशत तक महंगे हैं। इसी प्रीमियम वैल्यूएशन के कारण वैश्विक पूंजी भारत छोड़ रही है।

मजे की बात यह है कि बाजार की यही मजबूती बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) और प्राइवेट इक्विटी फंड्स के लिए बाहर निकलने का एक बड़ा मौका बन गई है। ऊंचे दाम पर अपनी हिस्सेदारी बेचकर ये कंपनियां और निवेशक अपना मुनाफा कमाकर अपने देश वापस ले जा रहे हैं, जो शुद्ध एफडीआई (FDI) के आंकड़ों को काफी कम कर रहा है।

ईरान युद्ध और भविष्य की चुनौतियां

ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल और अन्य वस्तुओं की कीमतों में आया उछाल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए दूसरी बड़ी चुनौती है। यदि युद्ध की स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो चालू खाता घाटा (CAD) जीडीपी के 0.9 प्रतिशत से बढ़कर 2.5 प्रतिशत तक जा सकता है। इससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव बनना तय है और मुद्रा के और फिसलने के संकेत हैं।

अल्पकाल में आरबीआई अपने विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग करके स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा है। लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए भारत को ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ यानी व्यापार करने में आसानी के मोर्चे पर बड़े सुधारों की आवश्यकता है। जब तक एफडीआई का प्रवाह नहीं बढ़ता, तब तक भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक झटकों से बचाना मुश्किल बना रहेगा।

Author: Rajesh Kumar

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