Himachal News: हिमाचल प्रदेश में नशे का जाल अब सफेदपोश और रसूखदार लोगों तक पहुंच गया है। देहरा पुलिस ने नशे के खिलाफ एक बहुत बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने दो कुख्यात नशा तस्करों को गिरफ्तार कर धर्मशाला जेल भेज दिया है। इन तस्करों की पहचान सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। पकड़े गए आरोपियों में एक पूर्व पार्षद और ज्वालाजी मंदिर का पूर्व पुजारी है। जबकि दूसरा आरोपी एक पूर्व पंचायत प्रधान का पति है। ये दोनों लंबे समय से युवाओं की रगों में जहर घोल रहे थे। पुलिस ने पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के तहत इन पर शिकंजा कसा है।
पुजारी से बना चिट्टे का सौदागर
पुलिस की गिरफ्त में आया पहला आरोपी मनु शर्मा उर्फ माल्टा है। मनु शर्मा ज्वालामुखी के वार्ड नंबर-4 का रहने वाला है। वह इलाके में ‘चिट्टे’ यानी हेरोइन की तस्करी का बड़ा नेटवर्क चलाता था। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि मनु शर्मा ज्वालामुखी का पूर्व पार्षद रह चुका है। यही नहीं, वह विश्व प्रसिद्ध ज्वालाजी मंदिर का बारीदार पुजारी भी था। एक समय था जब वह मंदिर में भक्तों को दर्शन करवाता था। लेकिन नशे की लत और पैसों के लालच ने उसे अपराधी बना दिया।
लोक-लज्जा से छोड़ा मंदिर, लेकिन अपराध नहीं
मनु शर्मा इससे पहले भी दो बार नशे के काले कारोबार में पकड़ा जा चुका है। वह दो बार धर्मशाला जेल की हवा भी खा चुका है। बार-बार जेल जाने से समाज में उसकी बदनामी हुई। इसी लोक-लज्जा के डर से उसने मंदिर जाना तो छोड़ दिया। लेकिन जेल से बाहर आने के बाद भी उसने हेरोइन बेचना बंद नहीं किया। अब देहरा पुलिस ने तीसरी बार उस पर यह सख्त और बड़ी कार्रवाई की है।
पूर्व प्रधान का पति भी निकला आदतन अपराधी
इस संयुक्त अभियान में पकड़ा गया दूसरा आरोपी विजय कुमार है। 52 वर्षीय विजय कुमार गरली का रहने वाला है। विजय मुख्य रूप से चरस की तस्करी करता था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार विजय एक आदतन अपराधी है। उसके खिलाफ पहले से ही नशे की तस्करी के चार बड़े मामले दर्ज हैं। विजय की राजनीतिक पहुंच भी काफी मजबूत है। उसकी पत्नी इलाके की एक पंचायत की पूर्व प्रधान रह चुकी हैं। ज्वालामुखी और रक्कड़ पुलिस ने मिलकर इन दोनों के ठिकानों पर दबिश दी और इन्हें दबोच लिया।
रसूखदारों पर पुलिस का कड़ा प्रहार
देहरा पुलिस ने इस कार्रवाई से एक बेहद कड़ा संदेश दिया है। पुलिस ने साफ कर दिया है कि नशे के धंधे में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। तस्करों की राजनीतिक पहुंच या उनका रसूख अब उन्हें पुलिस से नहीं बचा पाएगा। दोनों मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। अब पुलिस इनके पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है। इस काले धंधे से जुड़े अन्य लोगों की तलाश अब तेज कर दी गई है।

