New Delhi: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बृहस्पतिवार को एनसीईआरटी के उस फैसले का खुलकर सपोर्ट किया है, जिसके तहत कक्षा-9 की सोशल साइंस की किताब में आपातकाल के दौर पर एक नया चैप्टर शामिल किया गया है। पार्टी का कहना है कि देश के इतिहास के इस फेज को जानना बहुत जरूरी है।
संवैधानिक यात्रा का सबसे काला अध्याय और एनसीईआरटी की नई किताब
सत्तारूढ़ दल ने साल 1975 में आपातकाल लागू करने को लेकर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के इस नए कदम का विरोध कर रही है। सरकार इसे नई जनरेशन के लिए एक जरूरी सीख मान रही है।
एनसीईआरटी ने पहली बार सोशल साइंस की नई बुक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में आपातकाल पर यह स्पेशल चैप्टर जोड़ा है। इस अध्याय में आपातकाल को भारत में डेमोक्रेसी के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताते हुए लिखा गया है कि उस समय फंडामेंटल राइट्स को सस्पेंड कर दिया गया था।
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला के अनुसार, 25 जून 1975 का दिन भारत की लोकतांत्रिक और संवैधानिक यात्रा का सबसे डार्क चैप्टर था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौरान कांग्रेस ने हर संवैधानिक संस्था के स्ट्रक्चर पर हमला किया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में 21 महीने का आपातकाल लगाया था।
संवैधानिक संस्थाओं पर हमला और अधिकारों को सस्पेंड करने का आरोप
पूनावाला ने कहा कि आपातकाल सिर्फ सत्ता की भूख के कारण लागू किया गया था। उस समय संसद, विधायिका, न्यायपालिका और मीडिया पर कड़ा सेंसरशिप लगाकर उन्हें दबाया गया था। इस चैप्टर के माध्यम से छात्र देश के पॉलिटिकल क्राइसिस और उसके बाद हुए बदलावों को गहराई से समझ सकेंगे।
उन्होंने एक वीडियो स्टेटमेंट में कहा कि उस दौर में किशोर कुमार जैसे महान गायकों की आवाज दबाई गई और उनके गानों को आकाशवाणी से हटा दिया गया था। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि उस समय ज्यूडिशियल रिव्यू का अधिकार छीन लिया गया था और सभी संवैधानिक सुरक्षा उपायों को पूरी तरह खत्म कर दिया गया था।
भाजपा के अनुसार, एनसीईआरटी के सिलेबस में इस विषय को शामिल करने से छात्रों को इतिहास के सच को जानने में मदद मिलेगी ताकि ऐसी घटनाएं फ्यूचर में कभी न हों। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि कई दल जो कभी आपातकाल के खिलाफ लड़े थे, वे आज राजनीति के कारण कांग्रेस के साथ हैं।

