Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने चार वरिष्ठ अधिकारियों को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराते हुए दो-दो माह की कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने यह सख्त फैसला 6 दिसंबर 2023 के अपने आदेश की जानबूझकर अनदेखी करने पर सुनाया। सजा पाने वालों में पूर्व एसीएस मोहम्मद सुलेमान, आईएएस अधिकारी तारो राठी, स्वास्थ्य विभाग के डॉ. डी.के. तिवारी और मंदसौर के सीएमएचओ डॉ. गोविंद चौहान शामिल हैं।
क्या है पूरा मामला?
हाईकोर्ट ने6 दिसंबर 2023 को स्पष्ट आदेश दिया था कि मंदसौर स्वास्थ्य विभाग में 2004 से 7 अप्रैल 2016 तक कार्यरत कर्मचारियों को नियमित (परमानेंट) किया जाए। कोर्ट ने इस आदेश को लागू करने के लिए तीन महीने का समय दिया था। लेकिन संबंधित विभाग और अधिकारियों ने आदेश का पालन नहीं किया। इसके बाद कर्मचारियों ने अवमानना की 9 याचिकाएं दायर कीं।
अवमानना का दोषी क्यों ठहराया गया?
कोर्ट केस्पष्ट आदेश के बावजूद कार्रवाई न करना अदालत की अवमानना माना जाता है। न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि अधिकारियों ने आदेश की जानबूझकर अनदेखी की। इसके चलते सभी चार अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराया गया। कोर्ट ने उन्हें दो-दो महीने की सजा सुनाई।
सजा पर तीन हफ्ते की स्थगन, पालन का अंतिम मौका
हालांकिकोर्ट ने सजा को तीन हफ्तों के लिए स्थगित (स्टे) कर दिया है। अधिकारियों को आदेश का पालन करने का अंतिम मौका दिया गया है। यदि वे इस अवधि में आदेश लागू कर देते हैं, तो सजा टल सकती है। यह फैसला प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
मामलेपर पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है। अगर वरिष्ठ अधिकारी ही कोर्ट के आदेश नहीं मानेंगे, तो सिस्टम पर सवाल उठते हैं। उन्होंने सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह फैसला दिखाता है कि कोर्ट के आदेश की अवहेलना पर बड़े अधिकारी भी नहीं बच सकते। इससे प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही और कर्मचारियों के अधिकारों की न्यायिक सुरक्षा मजबूत हुई है।

