Ambala News: हरियाणा की राजनीति में जब भी बेबाकी और निर्भीकता का जिक्र होता है, तो कैबिनेट मंत्री अनिल विज का नाम सबसे आगे आता है। कभी बैंक काउंटर पर पासबुक एंट्री करने वाला एक साधारण कर्मचारी आज प्रदेश की सत्ता का सबसे प्रभावशाली चेहरा और ‘आयरन मैन’ बन चुका है।
सुषमा स्वराज के राज्यसभा जाने से बदली किस्मत
साल 1990 में अंबाला छावनी की तत्कालीन विधायक सुषमा स्वराज को भाजपा ने राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया। सीट खाली होने पर पार्टी संगठन ने आंतरिक सर्वे कराया, जिसमें अनिल विज का नाम सबसे ऊपर आया। उस समय विज को बैंक में नौकरी करते हुए 17 साल हो चुके थे।
आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद पार्टी के आदेश पर उन्होंने बैंक की नौकरी से इस्तीफा दे दिया और चुनाव मैदान में उतर गए। राजनीतिक विश्लेषकों के कयासों को दरकिनार करते हुए अंबाला की जनता ने विज को भारी मतों से जिताकर पहली बार में ही विधायक बना दिया।
तथ्यों के साथ विपक्ष में बुलंद की अपनी आवाज
बिना किसी राजनीतिक विरासत या बड़े खजाने के अनिल विज ने सदन में अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान बनाई। विपक्ष के विधायक के रूप में वे हमेशा ठोस तथ्यों और आंकड़ों के साथ सरकार को घेरते थे। प्रशासनिक लापरवाही पर उनकी आवाज सबसे मुखर रही है।
उनके 40 साल के राजनीतिक जीवन में 1994 का वह दौर भी आया जब पार्टी के कहने पर उन्होंने बिना कोई कारण पूछे एक सादे कागज पर अपना इस्तीफा दे दिया था। यह वाकया संगठन के प्रति उनके सर्वोच्च अनुशासन और अटूट निष्ठा को आज भी बयां करता है।
जातिगत समीकरणों से ऊपर जनसेवा को दी प्राथमिकता
हरियाणा की परंपरागत जातिगत राजनीति से अलग हटकर अनिल विज ने लगातार 7 बार विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की है। वर्तमान में वे ऊर्जा, परिवहन और श्रम जैसे भारी-भरकम विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। कामचोर और भ्रष्ट अधिकारियों पर उनकी सख्ती के चर्चे पूरे सूबे में हैं।
साल 2026 में भी एक बीमार नागरिक की मदद के लिए प्रदर्शनकारियों के बीच सीधे संवाद करने की उनकी शैली ने खूब सुर्खियां बटोरीं। विज की सबसे बड़ी ताकत उनकी स्पष्टवादिता है, जिसके कारण गांव से लेकर शहर तक हर वर्ग के लोग उन्हें अपना सच्चा जननेता मानते हैं।

