Delhi News: आज 18 जून 2026, दिन गुरुवार को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है. आज के दिन गुरु पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का महासंयोग बना है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह दुर्लभ समय आपकी किस्मत बदल सकता है. आज का दिन आध्यात्मिक और मानसिक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है.
पंडित सुरेश पांडेय के अनुसार आज राहुकाल दोपहर 1 बजकर 30 मिनट से 3 बजे तक रहेगा. इस समय शुभ कार्य वर्जित होते हैं. गुलिक काल सुबह 10 बजकर 38 मिनट तक रहेगा. भद्रा काल शाम को 6 बजकर 58 मिनट तक रहने वाला है. इस विशेष कालचक्र में मानव शरीर के ऊर्जा केंद्रों का बहुत बड़ा महत्व होता है.
मानव शरीर के सात चक्रों का क्या है असली महत्व?
मानव शरीर के अंदर मुख्य रूप से 7 चक्र मौजूद होते हैं. यह सभी चक्र व्यक्ति के मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को पूरी तरह नियंत्रित करते हैं. इन चक्रों का मुख्य कार्य शरीर में ऊर्जा को संतुलित रखना है. जब यह ऊर्जा संतुलित होती है, तब व्यक्ति को मानसिक शांति और गहरी भावनात्मक स्थिरता प्राप्त होती है.
हमारे शरीर के ये सातों ऊर्जा केंद्र अलग-अलग अंगों और भावनाओं से जुड़े होते हैं. इन चक्रों के नाम मूलाधार चक्र, स्वाधिष्ठान चक्र, मणिपुर चक्र, अनाहत चक्र, विशुद्ध चक्र, आज्ञा चक्र और सहस्त्रार चक्र हैं. इन सभी चक्रों को एक्टिवेट करके व्यक्ति अपने जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकता है और सफल बन सकता है.
मूलाधार चक्र एक्टिव होने से स्वभाव पर क्या असर पड़ता है?
शरीर में सबसे पहला ऊर्जा केंद्र मूलाधार चक्र को माना जाता है. यह रीढ़ की हड्डी के सबसे निचले हिस्से यानी टेलबोन के पास स्थित होता है. यह चक्र सीधे तौर पर पृथ्वी तत्व से जुड़ा है. मूलाधार चक्र के संतुलित होने से व्यक्ति की पर्सनैलिटी में जबरदस्त निखार आता है और आत्मविश्वास बढ़ता है.
यह चक्र व्यक्ति के भीतर अटूट वीरता, निर्भीकता और परम आनंद का भाव जागृत करता है. हालांकि इसके बहुत अधिक सक्रिय होने पर इंसान का स्वभाव आक्रामक हो जाता है. ऐसा व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने लगता है. इसलिए इस चक्र की ऊर्जा को हमेशा ध्यान द्वारा नियंत्रित करना बहुत जरूरी है.
स्वाधिष्ठान चक्र संतुलित रहने से कैसे बढ़ती है क्रिएटिविटी?
स्वाधिष्ठान चक्र शरीर में मूलाधार चक्र से करीब 3 सेंटीमीटर ऊपर की तरफ स्थित होता है. इसे मानव शरीर का दूसरा सबसे प्रमुख चक्र माना जाता है. यह ऊर्जा केंद्र जल तत्व से संबंधित होता है. यह चक्र व्यक्ति को जीवन की सभी नकारात्मक चीजों और बुरी आदतों से दूर रखता है.
अगर किसी व्यक्ति का स्वाधिष्ठान चक्र पूरी तरह संतुलित है, तो वह बहुत ईमानदार और क्रिएटिव होता है. उसकी रचनात्मक क्षमताएं बहुत बढ़ जाती हैं. लेकिन इसके जरूरत से ज्यादा सक्रिय होने पर व्यक्ति अत्यधिक भावुक हो जाता है. वह भावनाओं में बहकर गलत फैसले लेने लगता है, जिससे नुकसान होता है.
Author: Pandit Balkrishan Sharma

