New Delhi News: घरेलू कमोडिटी बाजार में मंगलवार को दिनभर की तेजी के बाद शाम के कारोबारी सत्र में अचानक भारी गिरावट देखने को मिली। सोने और चांदी में आई तेज बिकवाली से दोनों कीमती धातुओं के दाम धड़ाम हो गए। इसी के साथ अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते क्रूड ऑयल भी करीब 3.80 फीसदी तक फिसल गया।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने के वायदा भाव में एक फीसदी से ज्यादा की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। रात 9 बजे के करीब अगस्त डिलीवरी वाला सोना 1380 रुपए की कमजोरी के साथ 1,53,404 रुपए पर ट्रेंड करता दिखा। कारोबारी सत्र के दौरान सोने ने 1,52,920 रुपए का निचला स्तर छुआ।
चांदी के बाजारों में तो स्थिति और भी ज्यादा खराब रही। चांदी की कीमतों में 3.40 फीसदी यानी करीब 9,139 रुपए तक की भारी गिरावट देखने को मिली। शाम के कारोबार में चांदी 6,597 रुपए गिरकर 2,39,792 रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गई, जिससे खरीदारों को बड़ी राहत मिली है।
क्रूड ऑयल के दामों में भी आई 321 रुपए की बड़ी गिरावट
एमसीएक्स पर केवल कीमती धातुएं ही नहीं, बल्कि कच्चे तेल के दामों में भी भारी कटौती दर्ज की गई। क्रूड ऑयल का भाव 3.69 फीसदी यानी 321 रुपए टूटकर 8,386 रुपए प्रति बैरल पर आ गया। इस गिरावट के बाद निवेशकों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में राहत मिल सकती है।
बाजार के इस तरह अचानक औंधे मुंह गिरने के पीछे कई बड़े वैश्विक कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। सेबी रजिस्टर्ड मार्केट एंड कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया बयान के बाद पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद जगी है।
ट्रंप ने कहा कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान पर जवाबी कार्रवाई के मामले में उनकी बात का मान रखा है। अब ईरान और इजराइल के बीच शांति समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की सकारात्मक संभावना दिख रही है, जिसका सीधा असर ग्लोबल मार्केट पर पड़ा है।
मजबूत डॉलर और शांति वार्ता ने घटा दी सोने की मांग
विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे ही पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने के संकेत मिले, निवेशकों ने सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोना और चांदी खरीदना कम कर दिया। मांग में आई इसी अचानक कमी के कारण वैश्विक और घरेलू बाजारों में कीमतों पर भारी दबाव बन गया।
इसके अलावा अमेरिकी डॉलर में आई रिकॉर्ड मजबूती ने भी कमोडिटी मार्केट की कमर तोड़ दी है। आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी महंगे हो जाते हैं। इससे वैश्विक स्तर पर इनकी मांग घटती है और कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिलती है।
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, आने वाले दिनों में कमोडिटी मार्केट की चाल डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और पश्चिम एशिया के हालातों पर निर्भर करेगी। यदि शांति वार्ता सफल रहती है और डॉलर का दबदबा कायम रहता है, तो सोने-चांदी की कीमतों में यह मंदी आगे भी जारी रह सकती है।
Author: Rajesh Kumar

