गाजियाबाद का 12 साल पुराना मिस्ट्री केस: छात्र की मौत पर कोर्ट सख्त, पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट खारिज

Uttar Pradesh News: गाजियाबाद के जवाहर नवोदय विद्यालय में साल 2012 में हुई छात्र त्रिवेश कुमार की संदिग्ध मौत का मामला एक बार फिर गरमा गया है। विशेष अदालत (एससी-एसटी एक्ट) ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस द्वारा दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

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अदालत ने दिए दोबारा जांच के आदेश

अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराजगी जताते हुए गाजियाबाद के पुलिस आयुक्त को इस पूरे मामले की नए सिरे से निष्पक्ष जांच कराने का सख्त निर्देश दिया है। कोर्ट का मानना है कि पुलिस की शुरुआती जांच बेहद लचर थी और इसमें कई अहम पहलुओं को नजरअंदाज किया गया।

यह दर्दनाक घटना 12 अगस्त 2012 को अमोपुर बढ़ायला स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्रावास में हुई थी। छात्र त्रिवेश कुमार का शव संदिग्ध हालात में मिला था। पीड़ित मां लाजवंती ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे की आत्महत्या नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत बेरहमी से हत्या की गई थी।

क्या था हत्या के पीछे का विवाद?

मृतक छात्र की मां के अनुसार, घटना से कुछ दिन पहले त्रिवेश ने फोन पर बताया था कि स्कूल के कुछ छात्र उसे छात्राओं से बातचीत करने को लेकर लगातार धमका रहे हैं। कुछ लड़कों ने उसके साथ मारपीट भी की थी। मां का आरोप है कि इसी रंजिश के चलते उनके बेटे को निशाना बनाया गया।

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पीड़ित परिवार के लंबे संघर्ष और थाने के चक्कर काटने के बाद, घटना के करीब डेढ़ साल बाद 1 मार्च 2014 को मसूरी थाने में छह छात्रों प्रशांत, शशांक, फैजल खान, गौरव, हेमंत और रोहित के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज हुआ था। उस समय यह मामला पूरे देश में काफी गूंजा था।

पुलिस जांच में सामने आई बड़ी लापरवाही

पुलिस ने अपनी जांच में दावा किया था कि त्रिवेश ने कान की बीमारी से तंग आकर आत्महत्या की है। साक्ष्य के अभाव का हवाला देकर पुलिस ने कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी। मां ने आरोप लगाया कि पुलिस ने न तो घटनास्थल का सही निरीक्षण किया और न ही त्रिवेश के मोबाइल की कॉल डिटेल निकाली।

अदालत ने केस डायरी और पीड़ित मां की आपत्तियों का गहन अध्ययन करने के बाद माना कि पुलिस ने मामले को दबाने में जल्दबाजी दिखाई। कोर्ट ने 2014 की क्लोजर रिपोर्ट को निरस्त करते हुए कमिश्नर को आदेश दिया है कि 12 साल पुराने इस रहस्यमयी मामले की सच्चाई सबके सामने लाई जाए।

Author: Ajay Mishra

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