दिल्ली मास्टर प्लान 2041 में देरी से बढ़ा व्यापारियों का संकट, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर की हस्तक्षेप की मांग

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Delhi News: दिल्ली के व्यापारियों और उद्यमियों में मास्टर प्लान 2041 को लेकर इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है। दिल्ली का पूरा कारोबार इस समय गंभीर नीतिगत पंगुता में फंस गया है। चैम्बर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को इस मामले में तत्काल दखल देने के लिए एक पत्र लिखा है।

सीटीआई के अनुसार पिछले चार-पांच वर्षों की लंबी देरी के कारण बीस लाख से अधिक कारोबारी परेशान हैं। वे रोजाना दुकानों की सीलिंग, भारी-भरकम चालान और रिश्वत के डर के साए में जीने को मजबूर हैं। पुराना मास्टर प्लान 2021 दिसंबर 2021 में ही समाप्त हो चुका है।

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तीन वर्षों से केंद्र सरकार के पास लंबित है नया मास्टर प्लान

सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल और महासचिव रमेश आहूजा ने बताया कि डीडीए ने 28 फरवरी 2023 को नए मास्टर प्लान को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद इस ड्राफ्ट को अंतिम अधिसूचना के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा गया था। पर यह पिछले तीन साल से वहीं लंबित है।

मिक्स्ड लैंड यूज और कमर्शियल स्ट्रीट्स की नीतियां स्पष्ट न होने से दुकानदारों में साल 2018 जैसी सीलिंग का डर दोबारा लौट आया है। रिहायशी इलाकों में नई दुकानें खोलने या ऊपर की मंजिल बढ़ाने की कानूनी अनुमति नहीं मिल रही है, जिससे व्यापार का विस्तार रुक गया है।

महंगे कन्वर्जन चार्ज और बैंक ऋण न मिलने से कारोबारी परेशान

मास्टर प्लान 2041 के तहत कन्वर्जन चार्ज को काफी घटाने का अहम प्रस्ताव शामिल किया गया है। लेकिन अधिसूचना लागू न होने के कारण दुकानदारों को आज भी पुराने महंगे रेट पर भुगतान करना पड़ रहा है। प्रॉपर्टी सील होने के डर से बैंक भी कमर्शियल संपत्तियों पर ऋण नहीं दे रहे हैं।

दिल्ली की करीब नब्बे प्रतिशत औद्योगिक इकाइयां इस समय नॉन-कन्फर्मिंग क्षेत्र में चल रही हैं, जिससे उन पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। मास्टर प्लान में प्रस्तावित रिलोकेशन स्कीम और लैंड पूलिंग पॉलिसी पूरी तरह अटकी हुई है। नए कारखाने लगाने के लिए जरूरी अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिल पा रहे हैं।

रूफटॉप रेस्त्रां और नाइट इकोनॉमी के लाइसेंस पर लगी रोक

मास्टर प्लान में देरी से होटल, रेस्त्रां और बैंक्वेट हॉल के संचालक भी भारी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। योजना के तहत रूफटॉप रेस्त्रां, नाइट इकोनॉमी और टेरेस डाइनिंग को वैध किया जाना था। पर दिल्ली नगर निगम अभी नए नियम न होने से हेल्थ-ट्रेड लाइसेंस जारी नहीं कर रहा है।

इसके अलावा पुराने पार्किंग नियमों के कारण छोटे भूखंडों पर भी दो कारों की पार्किंग मांगी जा रही है और चालान काटे जा रहे हैं। नए मास्टर प्लान में होटलों को ज्यादा एफएआर देने का प्रावधान है। इसके लागू न होने से पर्यटन बढ़ने के बावजूद कमरों की भारी कमी बनी हुई है।

सर्कल रेट फ्रीज होने से दिल्ली सरकार को भारी राजस्व नुकसान

इस प्रशासनिक देरी की सबसे बड़ी मार दिल्ली के संपत्ति बाजार पर पड़ी है। रियल एस्टेट सेक्टर पूरी तरह ठप हो गया है क्योंकि सर्कल रेट साल 2021 से फ्रीज हैं। जमीन का वास्तविक बाजार रेट साल 2026 का चल रहा है, जबकि सरकारी रेट पांच साल पुराना है।

इस अंतर के कारण संपत्तियों की रजिस्ट्री आसानी से नहीं हो पा रही है और न ही बैंकों से लोन मिल पा रहा है। स्टाम्प ड्यूटी का पैसा न आने से दिल्ली सरकार को हर साल करीब दो हजार करोड़ रुपये के राजस्व का भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है।

सीटीआई ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से इस गंभीर मुद्दे पर केंद्र सरकार से तुरंत उच्च स्तरीय बातचीत करने का अनुरोध किया है। व्यापारियों ने मांग की है कि केंद्र के साथ मिलकर आगामी पंद्रह दिनों के भीतर इस मास्टर प्लान का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कराया जाए।

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