विधानसभा चुनाव परिणाम 2026: तमिलनाडु में डीएमके और कांग्रेस की राहें जुदा, ममता ने थामा विपक्षी एकता का दामन

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National News: देश के पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विधानसभा चुनाव परिणामों ने भारतीय राजनीति की बिसात पूरी तरह बदल दी है। असम और पुडुचेरी को छोड़कर बाकी राज्यों में नई सरकारों के गठन की सुगबुगाहट तेज है। हालांकि, इन नतीजों ने विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ गठबंधन की एकजुटता पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं। तमिलनाडु में जहां पुरानी दोस्ती में कड़वाहट आ गई है, वहीं पश्चिम बंगाल में हार के बाद ममता बनर्जी गठबंधन के और करीब आती दिख रही हैं।

तमिलनाडु में कांग्रेस के फैसले से डीएमके नाराज

तमिलनाडु के चुनावी नतीजों ने विपक्षी खेमे में भारी उथल-पुथल मचा दी है। राज्य की 234 सीटों में से अभिनेता विजय की नई पार्टी TVK ने 108 सीटें जीतकर सबको हैरान कर दिया। हालांकि, विजय बहुमत के आंकड़े से दूर रह गए। ऐसे में कांग्रेस ने सत्ताधारी डीएमके का साथ छोड़कर TVK को समर्थन देने का फैसला किया। कांग्रेस के इस अप्रत्याशित कदम से मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की पार्टी डीएमके बेहद नाराज है और उसने कांग्रेस पर वादाखिलाफी का गंभीर आरोप लगाया है।

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कांग्रेस सांसद का पलटवार और गठबंधन में दरार

डीएमके द्वारा लगाए गए ‘पीठ में छुरा घोंपने’ के आरोपों पर कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाया है। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि ऐसे आरोप दुर्भाग्यपूर्ण और पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जनता ने डीएमके के शासन के खिलाफ मतदान किया है, जिसका खामियाजा कांग्रेस को भी भुगतना पड़ा। टैगोर के अनुसार, तमिलनाडु का जनादेश बदलाव और विजय की सरकार के लिए है। इस बयानबाजी ने गठबंधन के भविष्य को संकट में डाल दिया है।

बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद ममता के बदले सुर

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को भाजपा के हाथों करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद भी चुनाव हार गईं, जिसके बाद राज्य में पहली बार भाजपा की सरकार बनने जा रही है। हार के बाद ममता ने विपक्षी एकजुटता की वकालत शुरू कर दी है। उन्होंने राहुल गांधी के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें भाजपा पर चुनाव चुराने का आरोप लगाया गया था। ममता ने स्पष्ट किया कि अब वह एक आम नागरिक के रूप में ‘इंडिया’ गठबंधन को मजबूत करेंगी।

विपक्षी एकजुटता के सामने भविष्य की बड़ी चुनौतियां

चुनाव परिणामों ने साबित कर दिया है कि विपक्षी दलों के बीच आपसी तालमेल की कमी का सीधा फायदा भाजपा को मिल रहा है। बंगाल में टीएमसी और वाम दलों के अलग-अलग लड़ने से विपक्ष की ताकत बिखर गई। अब ममता बनर्जी सोनिया गांधी, अखिलेश यादव और उद्धव ठाकरे जैसे नेताओं के संपर्क में हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि तमिलनाडु की कड़वाहट और बंगाल की हार के बाद विपक्षी दल कितनी मजबूती से साथ खड़े रह पाते हैं।

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