हर प्रेम संबंध का अंजाम शादी नहीं! इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज किया रेप का केस, कही बड़ी बात

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Prayagraj News: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शादी के झूठे वादे पर दर्ज बलात्कार के मामले को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अदालत ने मामला रद्द करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह बिल्कुल जरूरी नहीं है कि हर प्रेम संबंध का नतीजा शादी ही हो।

अदालत ने लिव-इन और बदलते रिश्तों पर जताई चिंता

न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने अपने ऐतिहासिक आदेश में कहा कि आजकल एक नया चलन देखने को मिल रहा है। लंबे समय तक आपसी सहमति से बने रिश्तों में खटास आने के बाद उन्हें आपराधिक रूप दे दिया जाता है। कानूनी व्यवस्था का ऐसा दुरुपयोग ठीक नहीं है।

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पीठ ने आगे कहा कि एक शिक्षित और स्वतंत्र वयस्क को यह समझना चाहिए कि रिश्ता टूटने पर कानून का सहारा लेकर उसे अपराध नहीं ठहराया जा सकता। व्यक्तिगत कारणों या प्राथमिकताओं में बदलाव से रिश्ते टूट सकते हैं। ऐसे मामलों को संवेदनशीलता और संयम से देखा जाना चाहिए।

क्या था प्रयागराज का यह पूरा विवाद?

यह मामला उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले का है, जहां एक युवती 2014 से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात आरोपी युवक से हुई। महिला ने आरोप लगाया कि पुरुष ने शादी का झांसा देकर उसके साथ पांच साल तक शारीरिक संबंध बनाए।

युवक द्वारा शादी से इनकार करने पर महिला ने 10 अगस्त 2019 को प्रयागराज में बलात्कार और धमकी के आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज करा दी। एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद दोनों परिवारों की सहमति से 27 अगस्त 2019 को आर्य समाज मंदिर में दोनों की शादी हो गई।

शादी के बाद भी पत्नी लड़ती रही केस

शादी संपन्न होने के बाद भी पीड़ित महिला ने अपना केस वापस नहीं लिया। उसका आरोप था कि पति उसे पत्नी का दर्जा और सम्मान नहीं दे रहा है। महिला ने पुलिस के सामने अपने पुराने बयानों को ही दोहराया, जिसके बाद जनवरी 2020 में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी।

इसके बाद आरोपी पति ने राहत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पति के वकील ने दलील दी कि महिला अत्यधिक शिक्षित है और उसके पास एमए, एलएलबी और बीएड की डिग्रियां हैं। वह अपने भले-बुरे और फैसलों के परिणामों को अच्छी तरह समझने में सक्षम है।

हाईकोर्ट ने कानूनी कार्यवाही को किया रद्द

अदालत ने दोनों पक्षों की लंबी बहस सुनने के बाद कहा कि महिला इतनी परिपक्व है कि वह अपने कृत्यों को समझ सके। यह नहीं कहा जा सकता कि सहमति किसी भ्रम में दी गई थी। पांच साल लंबा रिश्ता साफ करता है कि यह प्रेम संबंध टूटने का मामला है।

न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि एफआईआर केवल पुरुष पर शादी का दबाव बनाने और नाराजगी के कारण दर्ज कराई गई थी। इसमें कोई बलात्कार का अपराध नहीं बनता है। कोर्ट ने स्थानीय अदालत में लंबित मामले को रद्द करते हुए इसे समय की बर्बादी करार दिया।

Author: Ajay Mishra

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