सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र का बड़ा फैसला, एसिड अटैक से अंदरूनी चोट झेलने वाले पीड़ितों को भी मिलेगा दिव्यांगता का लाभ

Delhi News: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि एसिड अटैक से अंदरूनी चोट का शिकार हुए पीड़ितों को भी अब दिव्यांगता अधिकार कानून के दायरे में शामिल किया गया है। इसके लिए बाकायदा एक नई अधिसूचना जारी हो चुकी है। अब बिना किसी बाहरी घाव के भी पीड़ितों को कानूनी अधिकार और सुविधाएं मिलेंगी।

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सुप्रीम कोर्ट ने दिया था अहम कानूनी निर्देश

यह महत्वपूर्ण कदम सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के बाद उठाया गया है, जिसमें अदालत ने मई 2026 में केंद्र से कानून का दायरा बढ़ाने को कहा था। अदालत का मानना था कि तेजाब हमले के कारण शरीर के अंदर होने वाला नुकसान भी व्यक्ति के सामान्य जीवन और काम करने की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित करता है।

पीड़ितों को मिलेगी जरूरी सरकारी सहायता

इस बड़े कानूनी बदलाव के बाद अब आंतरिक चोट से जूझ रहे पीड़ितों को भी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिलेगा। इसके तहत उन्हें पुनर्वास, शिक्षा, सरकारी रोजगार में आरक्षण और अन्य जरूरी मदद आसानी से मिल सकेगी। अब बाहरी निशानों के बजाय वास्तविक शारीरिक नुकसान को मुख्य आधार माना जाएगा।

शुरुआती तारीख से ही लागू होगा नया संशोधन

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की पीठ के सामने सरकार ने यह पक्ष रखा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह नया संशोधन कानून के लागू होने के शुरुआती समय से ही प्रभावी माना जाएगा। इससे पहले के मामलों से जुड़े पीड़ित भी इस फैसले का पूरा फायदा उठा सकेंगे।

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शाहीन मलिक की याचिका पर हुई सुनवाई

शीर्ष अदालत दरअसल एसिड अटैक पीड़िता शाहीन मलिक की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि पुराने दिव्यांगजन कानून में केवल बाहरी शारीरिक विकलांगता ही शामिल थी। इसके बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कानून में संशोधन की आधिकारिक पुष्टि की।

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