Health News: अक्सर छोटे बच्चे खेल-खेल में मिट्टी, चॉक या दीवार का प्लास्टर खाने लगते हैं। कई बार माता-पिता इसे केवल एक सामान्य शरारत समझकर छोड़ देते हैं। मशहूर बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकुर धर्माणी के अनुसार, यह आदत ‘पिका’ नामक एक गंभीर चिकित्सीय समस्या का संकेत हो सकती है।
चिकित्सीय भाषा में जब कोई बच्चा लगातार एक महीने या उससे अधिक समय तक अखाद्य वस्तुएं खाने लगे, तो उसे पिका डिसऑर्डर कहा जाता है। इसके तहत बच्चे मुख्य रूप से मिट्टी, रेत, चॉक, कागज, साबुन, बाल, कपड़ा, राख या बहुत ज्यादा बर्फ खाने की जिद करने लगते हैं।
आखिर बच्चे क्यों खाते हैं मिट्टी और चॉक? जानें मुख्य वजह
विशेषज्ञों के मुताबिक, पिका बीमारी के पीछे कई शारीरिक और मानसिक कारण छिपे होते हैं। शरीर में मुख्य रूप से आयरन और जिंक की भारी कमी इसका बड़ा कारण है। इसके अलावा कुपोषण, ऑटिज्म, मानसिक तनाव, माता-पिता की उपेक्षा और व्यवहार संबंधी विकार भी इसके लिए जिम्मेदार होते हैं।
डॉ. धर्माणी ने चेतावनी देते हुए कहा कि इस आदत को नजरअंदाज करना बच्चों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। इससे बच्चों के पेट में गंभीर संक्रमण, आंतों में रुकावट और कीड़े हो सकते हैं। इसके साथ ही लीड विषाक्तता, गंभीर एनीमिया और कुपोषण का खतरा भी बढ़ जाता है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज, तुरंत लें डॉक्टर की सलाह
अभिभावकों को अपने बच्चों की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। यदि बच्चा लगातार एक महीने से ऐसी चीजें खा रहा है, तो सतर्क हो जाएं। इसके अलावा बच्चे में कमजोरी, शरीर का पीलापन, भूख न लगना, पेट दर्द या कब्ज जैसे लक्षण दिखने पर बाल रोग विशेषज्ञ से तुरंत संपर्क करें।
डॉक्टरों का कहना है कि हर मिट्टी खाने वाला बच्चा केवल जिद्दी नहीं होता। कई बार उसका नाजुक शरीर किसी अंदरूनी पोषण संबंधी कमी या बीमारी का संकेत दे रहा होता है। इसलिए बिना किसी देरी के समय पर जांच कराना और उचित डॉक्टरी उपचार शुरू करना बेहद जरूरी है।
इस खतरनाक बीमारी से अपने मासूम बच्चे को कैसे बचाएं?
माता-पिता को चाहिए कि वे ऐसी गंदी और अखाद्य वस्तुओं को हमेशा बच्चों की पहुंच से दूर रखें। बच्चे को डांटने या शर्मिंदा करने के बजाय प्यार और समझदारी से समझाएं। उनके दैनिक भोजन में शामिल पौष्टिक और संतुलित आहार पर विशेष ध्यान दें ताकि जरूरी पोषक तत्व मिल सकें।
इसके साथ ही बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच करवाएं और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का कोर्स पूरा करें। पिका से पीड़ित अधिकांश बच्चे सही समय पर उचित इलाज और सही पोषण मिलने के बाद पूरी तरह से स्वस्थ हो जाते हैं और उनकी यह आदत छूट जाती है।
Author: Asha Thakur


