भारत में कुपोषण तो घटा पर नई बीमारियों ने जकड़ा, NFHS-6 के आंकड़ों ने उड़ाई डॉक्टरों की नींद!

Delhi News: देश की सेहत को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) के ताजा आंकड़ों ने एक तरफ जहां बड़ी राहत दी है, वहीं दूसरी तरफ डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता को भी काफी ज्यादा बढ़ा दिया है।

इस नए और व्यापक सरकारी सर्वेक्षण के अनुसार, भारत ने बच्चों के पोषण, मातृ स्वास्थ्य और रिकॉर्ड टीकाकरण कवरेज में अभूतपूर्व और महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है। हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि देश में मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियां अब नया संकट बन रही हैं।

बच्चों के कुपोषण में दर्ज की गई ऐतिहासिक सुधार

साल 2023-24 के दौरान देश के 715 जिलों में लगभग 6.79 लाख परिवारों पर किए गए इस सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में कद की कमी (Stunting) का आंकड़ा 35.5% से घटकर अब 29.3% के स्तर पर आ गया है।

इसके साथ ही बच्चों में होने वाला गंभीर कुपोषण भी 7.7% से गिरकर 5.2% रह गया है। देश में पूर्ण टीकाकरण का दायरा बढ़कर 87.1% हो गया है और अस्पतालों में होने वाले संस्थागत प्रसव का आंकड़ा 90.6% तक पहुंच चुका है, जो एक बेहतरीन संकेत है।

गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में आया बड़ा बदलाव

सर्वेक्षण ने देश में मातृ और प्रजनन स्वास्थ्य के संकेतकों में भी काफी शानदार सुधार दिखाया है। सरकारी योजनाओं के जमीनी असर के कारण अब एएनसी (ANC) कवरेज बढ़कर 95.9% तक पहुंच गया है, जिससे गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की निगरानी आसान हुई है।

वरिष्ठ चिकित्सकों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को आयरन और फोलिक एसिड की पर्याप्त आपूर्ति मिलने से प्रसव के समय होने वाली जटिलताओं में भारी कमी आई है। इस प्रीनेटल देखभाल ने नवजात शिशुओं के दीर्घकालिक स्वास्थ्य को काफी ज्यादा मजबूत और सुरक्षित किया है।

60 फीसदी आबादी तक पहुंची स्वास्थ्य बीमा की ताकत

एनएफएचएस-6 की इस रिपोर्ट में देश के भीतर स्वास्थ्य बीमा की पहुंच में भी एक बहुत बड़ी और रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि पाई गई है। भारत में स्वास्थ्य बीमा का कुल कवरेज पिछले 41% के मुकाबले अब बढ़कर सीधे 60.2% के स्तर पर पहुंच गया है।

स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि केंद्र सरकार की ‘आयुष्मान भारत पीएम-जय’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं ने करोड़ों गरीब परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए एक मजबूत वित्तीय सुरक्षा कवच और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं तक आसान पहुंच प्रदान करने में बड़ी भूमिका निभाई है।

मोटापा और साइलेंट किलर बीमारियां बनीं नया संकट

एक तरफ जहां कुपोषण के खिलाफ भारत की जंग मजबूत हुई है, वहीं दूसरी तरफ यह रिपोर्ट देश में मोटापे और गैर-संचारी रोगों (NCDs) के एक नए और बेहद खतरनाक स्वास्थ्य संकट की तरफ साफ इशारा करती है, जो तेजी से पैर पसार रहा है।

वरिष्ठ डॉक्टरों के अनुसार, भारत में इन दिनों मोटापा, टाइप-2 मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लीवर और दिल की बीमारियां युवाओं को अपनी चपेट में ले रही हैं। खानपान में गड़बड़ी, शारीरिक निष्क्रियता, तनाव, खराब नींद और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन इसे बढ़ावा दे रहा है।

‘दोहरे बोझ’ के खतरनाक जाल में फंसा देश का हेल्थ सिस्टम

जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत इस समय एक बेहद अनूठी और जटिल चुनौती का सामना कर रहा है, जिसे मेडिकल की भाषा में ‘दोहरा बोझ’ कहा जाता है। इसमें देश की गरीब आबादी जहां आज भी एनीमिया और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से जूझ रही है।

वहीं दूसरी तरफ देश का मध्यम और उच्च आय वाला वर्ग तेजी से ओवरन्यूट्रिशन, मोटापे और पुरानी गंभीर बीमारियों की गिरफ्त में आता जा रहा है। ये दोनों ही स्थितियां देश के मौजूदा हेल्थकेयर सिस्टम और अस्पतालों के बुनियादी ढांचे पर भारी दबाव डाल सकती हैं।

निवारक स्वास्थ्य देखभाल ही है इस लाइलाज मर्ज की दवा

इस राष्ट्रीय सर्वेक्षण के निष्कर्ष देश में एक मजबूत और व्यावहारिक निवारक स्वास्थ्य देखभाल नीति (Preventive Healthcare Policy) की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। डॉक्टरों ने अब दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय अपनी जीवनशैली में बड़े सुधार करने पर विशेष जोर दिया है।

विशेषज्ञों ने आम जनता को संतुलित पोषण लेने, दैनिक जीवन में नियमित व्यायाम शामिल करने, चीनी और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों का सेवन पूरी तरह कम करने की सलाह दी है। इसके साथ ही मधुमेह और उच्च रक्तचाप की समय पर पहचान के लिए रूटीन चेकअप कराना जरूरी है।

चुनौतियों से भरा है भारत का यह स्वास्थ्य संक्रमण

हालिया रिपोर्ट साफ करती है कि भारत ने स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच और मातृ कल्याण के मोर्चे पर एक लंबी दूरी तय कर ली है। लेकिन डॉक्टरों का मानना है कि हमारी अगली और सबसे बड़ी राष्ट्रीय चुनौती इस नई जीवनशैली से उपजी बीमारियों को रोकना है।

अगर समय रहते मोटापे और डायबिटीज के इस बढ़ते ग्राफ को नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह आने वाले दिनों में एक बेहद भयावह राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल का रूप ले सकता है। भविष्य की प्रगति के लिए कुपोषण और आधुनिक विकारों दोनों पर समान ध्यान देना होगा।

Author: Asha Thakur

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