ऐश्वर्या राय की कूट्योर ड्रेस के स्केच पर मचा बवाल, रियल बॉडी से क्यों अलग होते हैं फैशन डिजाइनर्स के ये चित्र?

Entertainment: हाल ही में आयोजित हुए 79वें कान्स फिल्म फेस्टिवल में बॉलीवुड की ग्लोबल आइकन ऐश्वर्या राय बच्चन ने अपने हुस्न का जलवा बिखेरा। इस दौरान वह मशहूर भारतीय डिजाइनर अमित अग्रवाल की बेहद खास कूट्योर ड्रेस ‘लुमिनारा’ पहनकर रेड कार्पेट पर उतरी थीं, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही हैं।

इस बीच, सोशल मीडिया पर सिर्फ ऐश्वर्या राय का रेड कार्पेट लुक ही चर्चा में नहीं है, बल्कि डिजाइनर अमित अग्रवाल द्वारा शेयर किया गया इस ड्रेस का ओरिजिनल स्केच भी टॉक ऑफ द टाउन बना हुआ है। इस स्केच में मॉडल का फिगर सामान्य इंसानी शरीर के मुकाबले काफी ज्यादा पतला और लंबा दिखाया गया है।

क्या होते हैं ‘फैशन क्रोकी’ और क्यों हैं ये इतने पतले?

अमित अग्रवाल के इस स्केच को देखने के बाद कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर फैशन डिजाइनर वास्तविक शरीर से इतना अलग चित्र क्यों बनाते हैं। फैशन की दुनिया में इन शुरुआती 2D रेखाचित्रों को ‘फैशन क्रोकी’ (Fashion Croquis) कहा जाता है, जो पूरी तरह से कलात्मक होते हैं।

इंडस्ट्री के बड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इन स्केचों को जानबूझकर लंबा और अत्यधिक स्लिम बनाया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि कपड़ों का वास्तविक डिजाइन, उसका ड्रेप, सिलाई के कट्स, एम्ब्रॉयडरी और सिल्हूट कागज पर ज्यादा साफ और आकर्षक रूप से दिखाई दे सके।

आइडियल बॉडी नहीं, कपड़ों की खूबसूरती दिखाना है मकसद

फैशन डिजाइनर्स और फैशन स्कूलों के एक्सपर्ट्स ने साफ किया है कि इन पतले रेखाचित्रों का मकसद समाज के सामने किसी ‘आइडियल बॉडी’ या शरीर के परफेक्ट साइज को पेश करना बिल्कुल नहीं होता है। इनका एकमात्र उद्देश्य कपड़े के मूवमेंट, रेशियो और उसकी बारीक कारीगरी को उभारना होता है।

लंबे हाथ-पैर और छरहरे बदन वाले ये स्केच डिजाइनरों को कपड़ों की जटिल डिटेल्स दिखाने के लिए कैनवास पर ज्यादा जगह देते हैं। इसकी मदद से ड्रेस में दी गई प्लीट्स, लेयरिंग, बीडवर्क और बाकी हैवी डिजाइन एलिमेंट्स के तालमेल को मास्टर टेलर्स को समझाना काफी आसान हो जाता है।

पेरिस और यूरोप के हाउट कूट्योर से जुड़ी हैं जड़ें

फैशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, स्लिम और लंबे स्केच बनाने की यह परंपरा कोई नई नहीं है, बल्कि सदियों पुरानी है। इस कला की जड़ें प्राचीन यूरोपीय फैशन इलस्ट्रेशन और पेरिस की पारंपरिक हाउट कूट्योर (Haute Couture) संस्कृति में मिलती हैं। समय के साथ यह फैशन जगत की एक प्रामाणिक विजुअल लैंग्वेज बन गई।

एक साधारण मानव शरीर का अनुपात 7.5 या 8 हेड (सिर की लंबाई के बराबर) होता है, जबकि एक प्रोफेशनल फैशन क्रोकी को ड्रा करते समय डिजाइनर इसे 9 से 10 हेड तक लंबा कर देते हैं। इस नाटकीय खिंचाव से कपड़े का घेराव और उसकी ड्रेपिंग कागज पर अत्यंत प्रभावशाली नजर आती है।

बदलते वक्त के साथ फैशन वर्ल्ड में आ रहा है बड़ा बदलाव

हालांकि, आधुनिक दौर में अब फैशन इंडस्ट्री की इस पुरानी सोच और विजुअल लैंग्वेज में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। दुनिया भर के कई बड़े फैशन स्कूल, ब्रांड्स और प्रगतिशील डिजाइनर्स अब प्लस साइज और अलग-अलग रियल बॉडी टाइप्स को ध्यान में रखकर भी अपने क्रोकी स्केच तैयार कर रहे हैं।

अब इंडस्ट्री का मुख्य फोकस सिर्फ एक तयशुदा छरहरे फिगर पर नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग और हर तरह की बॉडी शेप पर फैशन को खूबसूरती व गरिमा से पेश करने पर है। अमित अग्रवाल के इस स्केच ने फैशन लवर्स को कपड़ों के पीछे छिपी इस अनूठी कला और तकनीक को समझने का एक शानदार मौका दिया है।

Author: Manisha Thakur

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