Bhopal News: कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के कारण एक बाघिन और उसके चार शावकों की दुखद मौत के बाद देश भर के अभयारण्यों में हड़कंप मच गया है। आवारा कुत्तों के माध्यम से फैलने वाले इस जानलेवा वायरस को लेकर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने सख्त एडवायजरी जारी की है।
इस संकट को देखते हुए राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के टाइगर रिजर्व में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। कान्हा में वन विभाग ने हाथियों के साथ पेट्रोलिंग शुरू कर दी है और रिजर्व के आस-पास के क्षेत्रों में अब तक 400 से अधिक कुत्तों का टीकाकरण अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है।
राजस्थान और उत्तराखंड में विशेष सतर्कता
रणथंभौर टाइगर रिजर्व में भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। जिला वन अधिकारी के अनुसार, रिजर्व के समीपवर्ती 30 गांवों में 350 से ज्यादा कुत्तों को टीका लगाया जा रहा है। इसके साथ ही, संक्रमण की आशंका को देखते हुए मिट्टी, पानी और वन्यजीवों के सैंपल लिए गए हैं ताकि समय रहते खतरे का पता लगाया जा सके।
उत्तराखंड के कॉर्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में भी फील्ड स्टाफ को अलर्ट मोड पर रखा गया है। चूंकि बाघ और गुलदार अक्सर आवारा कुत्तों का शिकार करते हैं, इसलिए संक्रमण का सीधा खतरा बना हुआ है। किसी भी वन्यजीव की असामान्य मौत या व्यवहार में बदलाव होने पर प्रोटोकॉल के तहत त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
उत्तर प्रदेश में निगरानी और सुरक्षा के उपाय
पीलीभीत और कतर्नियाघाट टाइगर रिजर्व में प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। वनकर्मियों के साथ-साथ पर्यटकों को ले जाने वाले गाइडों को भी सतर्क रहने के लिए कहा गया है। यदि किसी बाघ का व्यवहार सामान्य नहीं दिखता है, तो तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं। जंगल में लगे कैमरों से भी 24 घंटे निगरानी हो रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सीडीवी वायरस वन्यजीवों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) पर हमला करता है। इससे शावकों के जीवित रहने की दर कम हो जाती है। संक्रमित पशुओं में तेज बुखार, खांसी और पक्षाघात जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। एनटीसीए की एडवायजरी के अनुसार, वन्यजीवों को सुरक्षित रखने का एकमात्र तरीका बफर जोन में टीकाकरण ही है।
Author: Asha Thakur


