वसंत कुंज में बूंद-बूंद पानी को तरसे 400 परिवार! करोड़ों के आशियाने में रहने वाले लोग निजी टैंकरों के भरोसे, फूटा गुस्सा

Delhi News: दक्षिणी दिल्ली के वीआईपी इलाके वसंत कुंज डी-1 ब्लॉक में रहने वाले लोग इन दिनों बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च कर अपने सपनों का आशियाना बनाने वाले करीब 400 परिवारों के सामने पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

पिछले दो महीनों से जारी इस पेयजल संकट ने स्थानीय निवासियों की दिनचर्या को पूरी तरह से पटरी से उतार दिया है। भीषण गर्मी के इस मौसम में पानी न मिलने से लोगों में हाहाकार मचा हुआ है। बार-बार गुहार लगाने के बाद भी उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं हो रहा है।

प्रशासनिक चौखट पर माथा टेक कर हारे लोग

स्थानीय निवासियों ने अपनी इस गंभीर समस्या को लेकर दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी), मुख्यमंत्री कार्यालय और उपराज्यपाल तक का दरवाजा खटखटाया है। इसके साथ ही क्षेत्रीय जन प्रतिनिधियों से भी कई बार लिखित शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है, धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

डी-1 ब्लॉक के नागरिकों के मुताबिक, सरकारी सप्लाई लाइन में पानी का प्रेशर बेहद कम होने के कारण उनके घरों की टंकियों तक पानी पहुंच ही नहीं पा रहा है। सुबह और शाम को घंटों मोटर चलाकर इंतजार करने के बाद भी जरूरत भर का पानी नहीं मिल पा रहा है, जिससे गुस्सा बढ़ रहा है।

तीन महीने से खराब पड़ा है सबमर्सिबल पंप

इलाके में पानी की सुचारू आपूर्ति के लिए गेट नंबर-4 के पास एक बड़ा सबमर्सिबल पंप भी लगाया गया था। स्थानीय निवासी तिलक सचदेवा ने बताया कि यह पंप भी पिछले करीब तीन महीने से पूरी तरह खराब पड़ा है। जल बोर्ड ने इसे ठीक कराने की ज़हमत तक नहीं उठाई।

इस दोहरी मार के कारण अब स्थानीय लोग महंगे निजी टैंकरों और बोतलबंद पानी खरीदने पर निर्भर हो गए हैं। पानी के इन वैकल्पिक साधनों पर हर महीने हजारों रुपये अतिरिक्त खर्च हो रहे हैं। इससे मध्यम वर्गीय परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह से बिगड़ गया है।

स्थायी समाधान और नियमित टैंकरों की मांग

पीड़ित निवासियों की मांग है कि दिल्ली जल बोर्ड तुरंत कदम उठाए और खराब पड़े सबमर्सिबल पंप को जल्द से जल्द ठीक करवाए। लोगों का कहना है कि अगर यह पंप चालू हो जाता है, तो स्थानीय स्तर पर पानी की किल्लत काफी हद तक दूर हो सकती है।

इसके साथ ही निवासियों ने मांग की है कि जब तक समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं मिल जाता, तब तक प्रशासन की ओर से रोजाना नियमित रूप से पानी के टैंकर भेजे जाएं। ऐसा करने से ही इस तपती गर्मी में लोगों को कुछ राहत मिल पाएगी।

Author: Gaurav Malhotra

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