सरहद पार भी गूंजी सुरों की मल्लिका की आवाज: पाकिस्तान के स्कूलों में बजा था लता मंगेशकर का यह गाना, सुनकर रो पड़े थे लोग

Entertainment News: बॉलीवुड की स्वर कोकिला लता मंगेशकर आज भले ही इस भौतिक दुनिया में मौजूद नहीं हैं, लेकिन अपने अनमोल और सुरीले गानों की वजह से वह हमेशा ही करोड़ों फैंस के दिलों में जिंदा रहेंगी। लता जी ने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई ब्लॉकबस्टर गाने दिए हैं।

उन्होंने न सिर्फ हिंदी बल्कि दुनिया की कई अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी अपनी जादुई आवाज का जादू बिखेरा है। उनके गानों के दीवाने सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि सरहद पार पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं, जो आज भी उनके मुरीद हैं।

लता मंगेशकर ने रोमांटिक से लेकर इमोशनल और रोंगटे खड़े कर देने वाले देशभक्ति जैसे कई कालजयी गाने गाए थे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सुर कोकिला का एक बेहद प्रसिद्ध प्रार्थना गीत पाकिस्तान के स्कूलों में भी बजाया गया था, जिसे सुनकर लोगों की आंखें नम हो गईं।

पाकिस्तान के स्कूलों में गूंजी यह मशहूर भारतीय प्रार्थना

लता मंगेशकर के जिस ऐतिहासिक गाने की चर्चा हर तरफ होती है, वह साल 1957 में आई सुपरहिट फिल्म ‘दो आंखें बारह हाथ’ का है। इस बेहद लोकप्रिय गाने के बोल ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’ हैं, जिसे आज भी हर पीढ़ी के लोग बड़े चाव से सुनते हैं।

यह प्रार्थना गीत पाकिस्तान में भी इतना ज्यादा लोकप्रिय हुआ कि एक बार इसे वहां के एक स्कूल में एंथम (प्रार्थना) के तौर पर बजाया गया था। इस खूबसूरत गीत को मशहूर गीतकार भरत व्यास ने लिखा था और दिग्गज संगीतकार वसंत देसाई ने इसे संगीत से सजाया था।

अगर ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’ गाने के गहरे सार की बात करें, तो इसमें जीवन की घोर निराशा और अंधकार के बीच हमेशा आशा और नेकी के रास्ते पर चलने की सीख दी गई है। यह मानवीय गीत किसी एक धर्म या देश की सीमाओं तक सीमित नहीं है।

‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ के पीछे का दिलचस्प किस्सा

इसके साथ ही देश के सबसे प्रतिष्ठित देशभक्ति गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ के पीछे भी एक बेहद दिलचस्प ऐतिहासिक किस्सा छिपा हुआ है। बहुत कम लोग जानते हैं कि इस अमर गीत को गाने के लिए पहली पसंद लता मंगेशकर नहीं, बल्कि उनकी छोटी बहन आशा भोसले थीं।

इस महान गीत की शुरुआती रिहर्सल भी संगीतकारों द्वारा आशा भोसले से ही करवाई गई थी। लेकिन जब बाद में लता मंगेशकर ने इस गाने की धुन और इसके बोल सुने, तो उन्होंने खुद इस गाने को गाने की अपनी गहरी इच्छा जाहिर की, जिसे सबने सहर्ष स्वीकार किया।

कहा जाता है कि जब इस ऐतिहासिक गाने को पहली बार लेखक प्रदीप जी ने लता जी के सामने गुनगुनाया था, तो इसके भावुक बोल सुनकर लता मंगेशकर रो पड़ी थीं। उन्होंने तुरंत इस गाने के लिए हां कर दी, जिसके बाद यह गीत भारतीय संगीत के इतिहास का सबसे बड़ा मील का पत्थर बना।

Author: Manisha Thakur

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