Punjab News: सत्ता और कुर्सी का नशा जब सिर चढ़कर बोलने लगे, तो आम आदमी की आवाज दब जाती है। पंजाब की राजनीति में इन दिनों एक ऐसा भूचाल आया है जिसने पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पंजाब वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (डीएम) गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या ने राज्य की सियासत को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया है। अपनी मौत से पहले एक वीडियो में उन्होंने सीधा आरोप तत्कालीन परिवहन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर पर लगाया है। मंत्री पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगने के बाद पंजाब की भगवंत मान सरकार भारी दबाव में है। जनता और विपक्षी दल अब इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं।
मौत से पहले का वीडियो और मंत्री का इस्तीफा
गगनदीप सिंह रंधावा की मौत कोई सामान्य आत्महत्या नहीं है। यह सत्ता के उस भारी दबाव की कहानी है, जो एक अफसर को घुट-घुट कर मरने पर मजबूर कर देती है। रंधावा ने अपने आखिरी वीडियो में स्पष्ट रूप से बताया था कि मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। इस बड़े खुलासे के बाद पूरे पंजाब में भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। जनता के बढ़ते गुस्से और विपक्ष के तीखे हमलों के बाद अंततः मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर तो दर्ज कर ली है, लेकिन इंसाफ की मंजिल अभी भी बहुत दूर नजर आ रही है।
सीबीआई जांच से क्यों डर रही है सरकार?
इस पूरे मामले में आम आदमी पार्टी की सरकार का रुख लगातार सवालों के घेरे में है। डीएम रंधावा की पत्नी और उनका पूरा परिवार लगातार सीबीआई जांच की गुहार लगा रहा है। शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल और बिक्रम सिंह मजीठिया पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें इंसाफ का भरोसा दिला चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी के नेता सुनील जाखड़ ने भी मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा हमला बोला है। जाखड़ का आरोप है कि रंधावा के घर की बिजली काटी जा रही है और परिवार को डराने-धमकाने की गहरी साजिश रची जा रही है। ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि आखिर पंजाब सरकार इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच सीबीआई को सौंपने से क्यों हिचकिचा रही है।
इंसाफ की गुहार और सड़क पर उतरा पंजाब
सड़क से लेकर संसद तक अब केवल एक ही गूंज है – गगनदीप रंधावा को न्याय दो। चंडीगढ़ में इस घटना को लेकर विशाल और उग्र प्रदर्शन हुए हैं। रंधावा की बेटी ने कांपते हाथों और नम आंखों से जिस तरह इंसाफ की मांग की है, उसने पूरे पंजाब को रुला दिया है। परिवार का आरोप है कि पुलिस की हिरासत में भी पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर को वीआईपी सुविधाएं दी जा रही हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि कानून सबके लिए बराबर है। लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जब तक इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक पंजाब की जनता शांत बैठने वाली नहीं है। यह केवल एक अफसर की मौत का मामला नहीं है, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही का सबसे बड़ा इम्तिहान है।


