सिया हत्याकांड: क्या आरोपी विकास को मिलेगी फांसी? ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ कानून की पेचीदगियों में फंसा इंसाफ

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सरकाघाट में छात्रा सिया गुलेरिया की नृशंस हत्या ने पूरे राज्य में आक्रोश पैदा कर दिया है। स्थानीय लोग और विभिन्न सामाजिक संगठन आरोपी विकास पटियाल के लिए फांसी की सजा की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 103(1) के तहत मामला दर्ज किया है। कानून में इस धारा के तहत मौत की सजा का प्रावधान तो है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आरोपी का फांसी के फंदे तक पहुंचना इतना आसान नहीं है।

फांसी की सजा और ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ का सिद्धांत

भारतीय कानून व्यवस्था में मृत्युदंड केवल ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ यानी दुर्लभ से दुर्लभतम मामलों में ही दिया जाता है। उच्चतम न्यायालय ने 1980 में ‘बच्चन सिंह बनाम पंजाब राज्य’ मामले में यह सिद्धांत प्रतिपादित किया था। कानूनी जानकारों के अनुसार, केवल अपराध का क्रूर होना ही फांसी के लिए पर्याप्त नहीं है। अदालत यह देखती है कि क्या अपराध समाज की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला और अत्यंत विभत्स है। सिया हत्याकांड में आरोपी की ‘मानसिक सनक’ और ‘नशे की लत’ जैसे पहलू कानूनी बहस को प्रभावित कर सकते हैं।

हिमाचल के चर्चित मामलों में फांसी की सजा का इतिहास

हिमाचल प्रदेश में पिछले 15 वर्षों में केवल दो प्रमुख मामलों में फांसी की सजा सुनाई गई है। साल 2022 में सोलन की एक अदालत ने सात वर्षीय मासूम से दुष्कर्म और हत्या के मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ माना था। इसी तरह 2014 के बहुचर्चित ‘युग हत्याकांड’ में भी शिमला की अदालत ने फांसी दी थी। हालांकि, बाद में उच्च न्यायालय ने कुछ दोषियों को बरी कर दिया और एक की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। ये उदाहरण बताते हैं कि फांसी की सजा को बरकरार रखना एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है।

कानूनी विशेषज्ञों का नज़रिया और न्याय की लंबी प्रक्रिया

हिमाचल के पूर्व एडवोकेट जनरल विनय शर्मा सहित कई वरिष्ठ वकीलों का मानना है कि इस मामले में फांसी की संभावना कम है। कानून की प्रक्रिया निचली अदालत से शुरू होकर हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक जाती है। इसके बाद राष्ट्रपति के पास दया याचिका का विकल्प भी होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, चूंकि इस हत्याकांड के पीछे कोई पूर्व-नियोजित साजिश या आतंकी उद्देश्य नहीं था, इसलिए इसे दुर्लभतम श्रेणी में शामिल करना चुनौतीपूर्ण होगा। वर्तमान में आरोपी विकास मंडी जेल में न्यायिक हिरासत में है।

सिया के घर पहुंच रहे दिग्गज, सरकाघाट में भारी रोष

सिया हत्याकांड को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर आज पीड़ित परिवार से मिलने उनके गांव जाएंगे। इससे पहले कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह और अन्य भाजपा नेताओं ने भी परिवार को ढांढस बंधाया है। गुरुवार को सरकाघाट में पूर्व सैनिकों ने भी आरोपी के खिलाफ प्रदर्शन कर कड़े कानून की वकालत की। जनता का दबाव बढ़ रहा है, लेकिन न्यायपालिका केवल साक्ष्यों और स्थापित कानूनी सिद्धांतों के आधार पर ही सजा तय करेगी।

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