Himachal Pradesh News: सोलन जिले के दाड़लाघाट में रविवार शाम लोक निर्माण विभाग (PWD) के स्टोर में अचानक भीषण आग लग गई। इस हादसे से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी भयावह थी कि उसने देखते ही देखते पूरे सरकारी गोदाम को अपनी चपेट में ले लिया।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर एकत्र हो गए। सबसे पहले राहत कार्य के लिए पास के अंबुजा सीमेंट प्लांट से दमलक वाहन को बुलाया गया। लेकिन उस वाहन में केवल 200 लीटर पानी ही मौजूद था। इस वजह से शुरुआती दौर में आग बुझाने में भारी दिक्कत आई।
स्थानीय लोगों ने बाल्टियों से बुझाई आग
दमकल वाहन में पानी कम होने के कारण स्थानीय निवासियों ने मोर्चा संभाला। लोगों ने अपने घरों से बाल्टियों में पानी भर-भरकर आग पर काबू पाने की पूरी कोशिश की। लेकिन लपटें इतनी तेज थीं कि आम लोगों के प्रयास नाकाफी साबित हुए और आग लगातार फैलती गई।
स्थिति बेकाबू होते देख प्रशासन ने अर्की से अग्निशमन विभाग की विशेष टीम को तत्काल मौके पर बुलाया। अर्की से आए दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार लपटों पर काबू पाया। हालांकि, तब तक सरकारी स्टोर के भीतर रखा सारा कीमती सामान जलकर पूरी तरह राख हो चुका था।
दाड़लाघाट में फायर स्टेशन न होने से गुस्सा
इस भीषण हादसे के बाद अब क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय जनता का कहना है कि दाड़लाघाट एक बहुत बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है। इसके बावजूद प्रशासन ने यहां आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए फायर स्टेशन जैसी बुनियादी सुविधा नहीं दी है।
सेवानिवृत्त फायर ऑफिसर बंसी राम भाटिया ने भी इस लचर व्यवस्था पर अपनी गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पूरे अर्की उपमंडल के लिए महज एक अग्निशमन केंद्र उपलब्ध है। किसी भी बड़ी औद्योगिक दुर्घटना के समय यह अधूरी व्यवस्था कभी भी पर्याप्त साबित नहीं हो सकती है।
भाटिया ने आगे कहा कि दाड़लाघाट में स्थायी फायर स्टेशन न होने से नुकसान हमेशा बढ़ जाता है। जब तक अर्की से दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचती हैं, तब तक सब कुछ जल चुका होता है। पूर्व उपप्रधान राजेश गुप्ता ने भी सरकार से यहां स्थायी दमकल केंद्र खोलने की मांग की है।
36 साल पुराने महत्वपूर्ण दस्तावेज जलकर खाक
लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता बीआर कश्यप ने बताया कि आग लगने के असली कारणों का अभी पता नहीं चला है। इस अग्निकांड में वर्ष 1990 के बाद के कई महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज जल गए हैं। इसके साथ ही विभाग के कई जरूरी उपकरण भी नष्ट हुए हैं।
पीडब्ल्यूडी विभाग अब इस भीषण अग्निकांड से हुए कुल नुकसान का सटीक आकलन करने में जुटा है। सहायक अभियंता ने स्पष्ट किया कि विस्तृत विभागीय जांच के बाद ही वास्तविक आर्थिक नुकसान का पता चलेगा। पुलिस भी अपने स्तर पर मामले की बारीकी से जांच कर रही है।
Author: Sunita Gupta

