Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में तीसरे दिन भी सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप रही। सैहब सोसायटी के 800 से अधिक कर्मचारी वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर अड़े हुए हैं। इसके कारण शहर के हजारों घरों से सोमवार को भी कूड़ा नहीं उठ पाया है।
सफाई न होने से जगह-जगह कचरे के ढेर लग गए हैं। सोमवार सुबह सीटीओ चौक पर कर्मचारियों ने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने मांगें नहीं मानी तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज होगा।
नगर निगम अब ठेकेदारों से करवाएगा सफाई
सफाई संकट से निपटने के लिए नगर निगम ने शिमला की सफाई व्यवस्था आउटसोर्स करने का बड़ा फैसला लिया है। इसके लिए प्रशासन ने टेंडर भी जारी कर दिए हैं। अब ठेकेदारों के माध्यम से शहर के सभी वार्डों से कूड़ा उठाने की नई व्यवस्था शुरू की जाएगी।
इस नई योजना के तहत निजी ठेकेदार के कर्मचारी केवल कलेक्शन सेंटरों तक ही कूड़ा पहुंचाएंगे। इसके बाद नगर निगम अपने वाहनों से इस कचरे को भरयाल संयंत्र तक ले जाएगा। यदि मौजूदा हड़ताल खत्म नहीं होती है, तो यह व्यवस्था 20 मई से लागू होगी।
लिखित आदेश के बिना काम पर नहीं लौटेंगे
सैहब सोसायटी कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष जसवंत सिंह ने दो टूक कहा कि पहले मांगें पूरी की जाएं। नगर निगम ने बैठक बुलाने की सूचना सिर्फ फोन पर दी है। प्रशासन ने अब तक इसके लिए कोई लिखित पत्राचार या आधिकारिक नोटिस जारी नहीं किया है।
कर्मचारी नेता ने कहा कि सभी सफाईकर्मी अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह एकजुट हैं। जब तक वेतन वृद्धि की मुख्य मांग पूरी नहीं होती, कोई भी वापस नहीं जाएगा। दूसरी तरफ नगर निगम के आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की है।
एस्मा लागू, हड़ताली कर्मियों पर गिरेगी गाज
जिला दंडाधिकारी ने शहर में आवश्यक सेवाएं बनाए रखने के लिए एस्मा कानून लागू कर दिया है। इसके बावजूद सफाईकर्मियों की हड़ताल जारी है। जिला प्रशासन ने इसे सरकारी आदेशों का सीधा उल्लंघन माना है। नगर निगम अब अनुपस्थित कर्मचारियों की सूची तैयार कर रहा है।
आयुक्त ने बताया कि हड़ताल पर रहने वाले कर्मचारियों की रोजाना की तनख्वाह काटी जाएगी। शुरुआत में दो दिन का वेतन काटा जा रहा है। इसके साथ ही हड़ताल के लिए उकसाने वाले बड़े कर्मचारी नेताओं को नौकरी से भी हाथ धोना पड़ सकता है।
कर्मचारी नेताओं पर दबाव बनाने का आरोप
नगर निगम प्रशासन का दावा है कि एस्मा लागू होने के बाद कई सामान्य कर्मचारी काम पर आना चाहते हैं। इन कर्मचारियों ने व्यक्तिगत रूप से अधिकारियों से संपर्क भी किया है। लेकिन यूनियन के बड़े पदाधिकारी और सुपरवाइजर उन पर वापस न लौटने का दबाव बना रहे हैं।
आयुक्त भूपेंद्र अत्री के पास ऐसी कई गंभीर शिकायतें लिखित रूप में पहुंची हैं। प्रशासन ने साफ किया है कि सुरक्षा चाहने वाले कर्मचारियों को पूरा संरक्षण मिलेगा। ड्यूटी पर बाधा डालने वाले नेताओं के खिलाफ कानूनी धाराओं के तहत सख्त पुलिस कार्रवाई की जाएगी।
Author: Sunita Gupta

