Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट बनवाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपी ने इसी प्रमाण पत्र की मदद से सरकारी स्कूल में टीजीटी शिक्षक की नौकरी भी हासिल कर ली थी।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इसकी खुफिया जांच की। विजिलेंस की रिपोर्ट के आधार पर बिलासपुर पुलिस ने भराड़ी थाना में आरोपी के खिलाफ विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत केस दर्ज कर आगामी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
गलत जानकारी देकर हथियाया गरीबों का हक
विजिलेंस ब्यूरो की जांच में सामने आया कि भराड़ी क्षेत्र के एक ग्रामीण ने ऑनलाइन आवेदन के दौरान अपनी वास्तविक आय को छिपाया। उसने कम आय का झूठा प्रमाण पत्र पेश कर ईडब्ल्यूएस श्रेणी का लाभ लिया। इससे असली हकदार और गरीब उम्मीदवारों का अधिकार प्रभावित हुआ है।
आरोपी ने 15 दिन में ही छोड़ दी थी नौकरी
पुलिस उपाधीक्षक विशाल वर्मा ने मामले की पुष्टि की है। वहीं दूसरी ओर, आरोपी का कहना है कि उसने नौकरी ज्वाइन करने के मात्र 15 दिन बाद ही इस्तीफा दे दिया था। जांच के दौरान पिता की आय जोड़े जाने के कारण उसकी कुल पारिवारिक आय सीमा से अधिक हो गई थी।
जानिए किन लोगों का नहीं बन सकता ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र
- अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी आरक्षण का लाभ पाने वाले नागरिक।
- जिनके पूरे परिवार की कुल वार्षिक सकल आय 8 लाख रुपये से अधिक हो।
- जिनके स्वामित्व में 5 एकड़ या उससे ज्यादा कृषि योग्य भूमि हो।
- जिनके पास 1000 वर्ग फुट से अधिक का आवासीय फ्लैट उपलब्ध हो।
- अधिसूचित नगर पालिका क्षेत्र में 100 वर्ग गज से बड़ा आवासीय प्लॉट हो।
- गैर-अधिसूचित क्षेत्र में 200 वर्ग गज से अधिक का आवासीय प्लॉट हो।
इस नियम के तहत परिवार की आय की गणना की जाती है। इसमें मुख्य रूप से आवेदक, उसके माता-पिता, पति या पत्नी और 18 वर्ष से कम उम्र के अविवाहित भाई-बहन तथा बच्चों की कुल वार्षिक आय और संपत्ति को एक साथ मिलाकर देखा जाता है।
Reported By: Sunita Gupta


