Education News: लंदन स्थित वैश्विक उच्च शिक्षा विश्लेषक क्यूएस क्वाक्वेरेली साइमंड्स ने अपनी 16वीं वार्षिक ‘क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स बाय सब्जेक्ट’ जारी कर दी है। इस वर्ष की रैंकिंग भारत के लिए ऐतिहासिक रही। चार आईआईटी, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) और बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (बीआईटीएस), पिलानी ने दुनिया के शीर्ष 50 संस्थानों में अपनी जगह बनाई है। 100 से अधिक देशों के 1,900 विश्वविद्यालयों के 21,000 से अधिक शैक्षणिक कार्यक्रमों का विश्लेषण किया गया।
भारतीय संस्थानों का अभूतपूर्व प्रदर्शन
भारत नेइस साल विभिन्न विषयों और संकाय क्षेत्रों में शीर्ष 50 में से 27 स्थान हासिल किए हैं, जो 2024 में दर्ज 12 स्थानों की तुलना में दोगुने से अधिक हैं। यह उल्लेखनीय वृद्धि 12 अलग-अलग संस्थानों के उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण संभव हुई है। इंडियन स्कूल ऑफ माइंस (आईएसएम), धनबाद खनिज और खनन इंजीनियरिंग में वैश्विक स्तर पर 21वें स्थान पर रहा। आईआईएम अहमदाबाद ने बिजनेस एंड मैनेजमेंट स्टडीज और मार्केटिंग दोनों में 21वां स्थान प्राप्त किया।
पहली बार मार्केटिंग विषय में भारत की उपस्थिति
भारत नेपहली बार ‘मार्केटिंग’ के वैश्विक रैंकिंग विषय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। आईआईटी दिल्ली ने इस संस्करण में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, जिसमें उसके छह प्रोग्राम शीर्ष 50 में शामिल हैं। आईआईटी दिल्ली ने केमिकल इंजीनियरिंग (48वां), इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग (36वां) और कंप्यूटर साइंस (45वां) जैसे विषयों में भारत का नेतृत्व किया है।
आईआईटी बांबे, खड़गपुर और मद्रास ने मजबूत की स्थिति
आईआईटीबांबे, खड़गपुर और मद्रास ने भी शीर्ष 50 में अपनी स्थिति मजबूत की है। जेएनयू और बीआईटीएस पिलानी ने अपनी शैक्षणिक प्रतिष्ठा को वैश्विक स्तर पर साबित किया है। कुल मिलाकर, यह रैंकिंग भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली की बढ़ती वैश्विक साख और भविष्य की संभावनाओं को दर्शाती है।
क्यूएस सीईओ ने की भारत की प्रगति की सराहना
भारत कीइस प्रगति पर टिप्पणी करते हुए क्यूएस क्वाक्वेरेली साइमंड्स की सीईओ जेसिका टर्नर ने कहा कि इस वर्ष भारत का उत्थान गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में आई गति को दर्शाता है। इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी और व्यवसाय के क्षेत्र में सुधारों का विस्तार एक ऐसी प्रणाली का संकेत देता है जो मजबूत इरादे के साथ तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अगला चरण इस बात से परिभाषित होगा कि संस्थान अनुसंधान की शक्ति को कितनी प्रभावी ढंग से गहरा करते हैं और वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्टता को निखारते हैं।


