Himachal News: हिमाचल प्रदेश में लोगों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ पकड़ा गया है। राज्य ड्रग विभाग और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने एक बड़ी कार्रवाई की है। जांच के दौरान गुणवत्ता में भारी खामियां मिलने पर 88 दवा कंपनियों का उत्पादन तुरंत रोक दिया गया है। इसके साथ ही मानकों पर फेल हुई 73 दवाओं के लाइसेंस भी निरस्त कर दिए गए हैं। सरकार के इस सख्त कदम से पूरे फार्मा उद्योग में हड़कंप मच गया है।
गुणवत्ता जांच में फेल हुए दवाओं के सैंपल
जांच एजेंसियों ने राज्य के कई फार्मा उद्योगों का संयुक्त निरीक्षण किया था। इस जांच में जोखिम आधारित खामियां और कई गंभीर कमियां पाई गईं। कई दवाओं के सैंपल गुणवत्ता के पैमाने पर पूरी तरह फेल हो गए। राज्य ड्रग नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने बताया कि मानकों की भारी अनदेखी के कारण यह सख्त कार्रवाई की गई है। उन्होंने साफ किया कि मरीजों की जान और सुरक्षा के साथ कोई भी समझौता बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगा।
खराब दवाओं की लिस्ट पोर्टल पर हुई जारी
जिन 88 उद्योगों का उत्पादन रोका गया है, उन्हें अब सख्त निगरानी में रखा गया है। विभाग ने 73 खराब गुणवत्ता वाली दवाओं की सूची को सीडीएससीओ (CDSCO) पोर्टल पर डाल दिया है। राज्य ड्रग नियंत्रक ने आम जनता से भी एक खास अपील की है। उन्होंने कहा है कि उपभोक्ता पोर्टल पर जाकर खराब दवाओं की लिस्ट जरूर चेक करें। लोगों को पोर्टल पर दर्ज इन गुणवत्ताहीन दवाओं की खरीद से बचने की सलाह दी गई है।
सुधार के बाद ही मिलेगी दोबारा अनुमति
अब ड्रग विभाग खुद इन कंपनियों के सैंपलों की दोबारा कड़ी जांच करेगा। विभाग ने दवा निर्माताओं को अपनी गुणवत्ता सुधारने के लिए थोड़ा समय दिया है। कंपनियों को दोबारा उत्पादन शुरू करने के लिए सभी जरूरी मानकों को सख्ती से पूरा करना होगा। जब तक अधिकारी पूरे प्लांट का दोबारा निरीक्षण नहीं कर लेते, तब तक किसी को काम की अनुमति नहीं मिलेगी। मानकों पर पूरी तरह खरा उतरने के बाद ही इन कंपनियों में काम दोबारा शुरू हो पाएगा।


