NEET 2026 विवाद: क्या लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर? CBI की एंट्री और राजनीतिक घमासान ने बढ़ाई हलचल

Odisha News: मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 में कथित धांधली और पेपर लीक के आरोपों ने अब देशव्यापी विवाद का रूप ले लिया है। इस गंभीर मामले की जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने शिक्षा मंत्रालय की शिकायत पर FIR दर्ज कर ली है। जांच एजेंसी ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और सबूतों को मिटाने जैसी गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। विशेष CBI टीमें अब देश के विभिन्न हिस्सों में तैनात होकर परीक्षा संचालन में हुई खामियों की पड़ताल कर रही हैं।

छात्रों में भारी निराशा और मानसिक तनाव

इस विवाद ने खासकर ओडिशा के हजारों छात्रों को मानसिक रूप से तोड़ दिया है। लंबे समय से तैयारी कर रहे उम्मीदवारों का कहना है कि यह स्थिति उनके लिए बेहद थकाने वाली है। तन्वी साहू जैसी छात्राएं परीक्षा की शुचिता पर सवाल उठा रही हैं। उनका मानना है कि NEET को ऑनलाइन मोड में शिफ्ट करने से पेपर लीक की घटनाओं पर लगाम लग सकती है। छात्रों के अनुसार, बार-बार होने वाली ऐसी गड़बड़ियां उनकी बरसों की मेहनत को पूरी तरह बर्बाद कर देती हैं।

भविष्य को लेकर अनिश्चितता का माहौल

ओडिशा के कई अन्य छात्र जैसे स्वस्तिक पट्टनायक और शगुन समंताराय ने इस विवाद पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उनका कहना है कि परीक्षा प्रणाली में सेंध लगने से लाखों युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है। स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि अब छात्र विकल्प के तौर पर JEE जैसी अन्य परीक्षाओं की ओर रुख कर रहे हैं। बार-बार परीक्षा स्थगित होने या लीक होने से छात्रों को अपनी पूरी तैयारी फिर से शून्य से शुरू करनी पड़ती है।

सोशल मीडिया पर फूटा जनता का गुस्सा

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। नेटिजन्स परीक्षा सुरक्षा में हुई चूक के लिए सीधे तौर पर अधिकारियों और व्यवस्था को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि शिक्षा प्रणाली को उन 22 लाख प्रभावित छात्रों के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। लोगों का मानना है कि परीक्षा सुरक्षा में बार-बार होने वाली यह विफलता देश के होनहार युवाओं के भविष्य के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है।

विपक्ष ने बोला हमला, इस्तीफे की मांग तेज

इस मामले पर राजनीतिक पारा भी काफी चढ़ गया है। विपक्षी दलों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर विफल रहने का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इसे छात्रों के विश्वास पर गहरा आघात बताया है। पटनायक के अनुसार, जब परीक्षाओं की पवित्रता भंग होती है, तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि लाखों छात्रों के साथ किया गया विश्वासघात है। विपक्षी नेताओं ने सरकार पर युवाओं के भविष्य को अनिश्चितता में धकेलने का आरोप लगाया है।

22 लाख छात्रों के भविष्य का सवाल

बीजेडी (BJD) और कांग्रेस के छात्र संगठनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार को घेरा है। चिन्मय साहू और इप्सिता साहू जैसे युवा नेताओं का कहना है कि सरकार ने 22 लाख छात्रों के भविष्य को मजाक बना दिया है। ओपीसीसी प्रवक्ता देबाशीष भुइयां ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज छात्र खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। फिलहाल, पूरा देश अब CBI की जांच रिपोर्ट और सरकार के अगले ठोस कदम का इंतजार कर रहा है।

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