Rajasthan News: मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के पेपर लीक मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। राजस्थान में एक व्हाट्सएप मैसेज पर ‘फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स’ के टैग ने इस संगठित अपराध की पोल खोल दी है। जांचकर्ताओं को एक तथाकथित ‘गेस पेपर’ की पड़ताल के दौरान इस बड़े नेटवर्क का सुराग मिला। राजस्थान स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने ‘प्राइवेट माफिया’ नाम के एक व्हाट्सएप ग्रुप का पता लगाया है। इस ग्रुप में शामिल होने के लिए लोगों से भारी वसूली की गई थी।
नासिक से जुड़ा पेपर लीक का मुख्य सूत्रधार
इस मामले की प्रारंभिक जांच अब महाराष्ट्र के नासिक तक पहुंच गई है। नासिक पुलिस ने 30 वर्षीय मेडिकल छात्र शुभम खैरनार को हिरासत में लिया है। आरोप है कि उसने परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र हासिल कर उसे सोशल मीडिया पर साझा किया था। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि शुभम को यह पेपर पुणे के एक साथी से मिला था। आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अपने बाल तक कटवा लिए थे। अब उसे आगे की कड़ी पूछताछ के लिए सीबीआई को सौंप दिया गया है।
व्हाट्सएप पर 5 हजार से 15 लाख तक का सौदा
जांच में सामने आया है कि पेपर लीक सिंडिकेट ने बेहद शातिराना तरीके से काम किया। व्हाट्सएप ग्रुप में एंट्री के लिए 5,000 रुपये लिए जा रहे थे। वहीं, मुख्य आरोपियों ने इस पेपर को 10 से 15 लाख रुपये में बेचा। शुभम खैरनार पर आरोप है कि उसने गुरुग्राम और अन्य इलाकों के लोगों को यह सामग्री भेजी थी। इसके बाद यह कथित प्रश्नपत्र राजस्थान, बिहार, केरल और उत्तराखंड जैसे कई राज्यों में आग की तरह फैल गया।
MBBS छात्र ने पिता को भेजा था लीक पेपर
राजस्थान के सीकर जिले में भी SOG की जांच तेज हो गई है। जांच में एक चौंकाने वाली कड़ी सामने आई है। केरल में पढ़ाई कर रहे शेखावाटी के एक MBBS छात्र ने अपने पिता को यह पेपर भेजा था। उसके पिता इलाके में पेइंग-गेस्ट (PG) आवास चलाते हैं। इसके बाद पेपर को कई अन्य लोगों के साथ साझा किया गया। SOG ने अब तक 150 छात्रों और 70 अभिभावकों की सूची केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है।
राजस्थान नहीं बल्कि दूसरे राज्य थे मुख्य केंद्र
SOG के इंस्पेक्टर जनरल अजय पाल लांबा ने स्पष्ट किया कि राजस्थान इस लीक का शुरुआती केंद्र नहीं था। जांच के अनुसार, पेपर गुरुग्राम के रास्ते राजस्थान पहुंचा था। आरोपियों ने असली प्रश्नपत्र को ‘गेस पेपर’ बताकर बेचने की गहरी साजिश रची थी। अधिकारियों ने उन दावों को भी खारिज कर दिया है जिनमें राजस्थान के पुराने नकल गिरोहों का हाथ बताया जा रहा था। यह पूरी तरह से एक नया और संगठित अंतरराज्यीय गिरोह प्रतीत हो रहा है।
व्हिसलब्लोअर की शिकायत और NTA की भूमिका
सूत्रों का कहना है कि पुलिस की सक्रियता से पहले ही एक व्हिसलब्लोअर ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को शिकायत भेजी थी। NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने पुष्टि की है कि शिकायतकर्ता को परीक्षा से पहले व्हाट्सएप पर कुछ सवाल मिले थे। चौंकाने वाली बात यह है कि 150 पन्नों की पीडीएफ फाइल में मौजूद 400 सवालों में से 120 सवाल असली परीक्षा में आए थे। फिलहाल, शिकायत करने वाला व्यक्ति भी अब जांच एजेंसियों के संदेह के घेरे में है।


