हिमाचल सरकार का बड़ा यू-टर्न, लड़कियों और लड़कों के स्कूलों का विलय रद्द; अब CBSE और HP बोर्ड पैटर्न पर होगा संचालन

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के स्कूली शिक्षा विभाग ने एक बड़े प्रशासनिक फैसले में तत्काल बदलाव करते हुए लड़के और लड़कियों के स्कूलों के विलय के आदेश को वापस ले लिया है। सरकार ने चार स्थानों पर प्रस्तावित इस सहशिक्षा मॉडल को रद्द कर नई व्यवस्था लागू की है। अब ये विद्यालय एक साथ होकर भी अलग-अलग बोर्ड के पैटर्न पर चलेंगे। शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने इस आशय की अधिसूचना जारी कर साफ कर दिया है कि एक परिसर में दोनों स्कूल स्वतंत्र रूप से कार्य करेंगे।

इन चार स्थानों के स्कूलों का विलय हुआ रद्द

शिक्षा विभाग ने जिन स्कूलों को मिलाकर एक करने का निर्णय लिया था, उनमें कांगड़ा जिले के नूरपुर में बख्शी टेक चंद गर्ल्स स्कूल और बॉयज़ स्कूल शामिल हैं। इसके अलावा धर्मशाला का पीएम श्री गर्ल्स स्कूल और बॉयज़ सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मंडी के सरकाघाट का मॉडल स्कूल और गर्ल्स स्कूल, तथा देहरा का मॉडल स्कूल और गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल की मर्जर योजना रद्द हुई है।

दो स्कूल, एक परिसर लेकिन अलग बोर्ड

नई अधिसूचना के अनुसार इन परिसरों में दोनों विद्यालय सहशिक्षा के रूप में संचालित तो होंगे, लेकिन उनकी शैक्षिक संबद्धता अलग-अलग रहेगी। एक स्कूल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई से जुड़कर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के रूप में काम करेगा। जबकि दूसरा विद्यालय हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध रहेगा और उसे हाई स्कूल के दर्जे में चलाया जाएगा। इस तरह एक ही परिसर में बच्चों को दो बोर्ड का विकल्प मिलेगा।

निदेशक तय करेंगे भवन और संसाधनों का बंटवारा

विभाग ने बुनियादी ढांचे और उपलब्ध संसाधनों के बंटवारे का अंतिम अधिकार शिक्षा निदेशक को सौंपा है। निदेशक स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध सुविधाओं का आकलन कर यह सुनिश्चित करेंगे कि किस भवन में सीबीएसई स्कूल चलेगा और किसमें राज्य बोर्ड का विद्यालय। इसके लिए कक्षा-कक्षों की संख्या, प्रयोगशालाओं की स्थिति और छात्रों की सुविधा जैसे कारकों को प्राथमिकता दी जाएगी।

अभिभावकों और छात्रों को मिलेगा दोहरा लाभ

सरकार के इस संशोधित फैसले से संबंधित क्षेत्रों की मौजूदा शैक्षिक व्यवस्था को स्थिरता मिलेगी। इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह है कि क्षेत्र के विद्यार्थियों को एक ही स्थान पर सीबीएसई और राज्य बोर्ड दोनों माध्यमों से पढ़ाई का अवसर मिल सकेगा। विभाग का कहना है कि इससे स्कूलों की अलग पहचान कायम रहेगी और शिक्षा की गुणवत्ता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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