Faridabad News: भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय संबंधों और औद्योगिक सहयोग को एक नई दिशा देने के लिए एक बड़ी पहल की गई है। फरीदाबाद के जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (वाईएमसीए) ने आज जापान के फुकुओका प्रीफेक्चर से आए एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी की।
वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के उप महानिदेशक ने किया नेतृत्व
इस महत्वपूर्ण जापानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व फुकुओका प्रीफेक्चरल गवर्नमेंट के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के उप महानिदेशक श्री नाकानो शिन्या ने किया। इस अंतरराष्ट्रीय दल में फुकुओका इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सचिव जनरल श्री मिसावा रेइइचिरो सहित कई अन्य वरिष्ठ जापानी अधिकारी भी विशेष रूप से शामिल थे।
जापानी टीम ने विश्वविद्यालय परिसर का दौरा कर मानव संसाधन (ह्यूमन रिसोर्स) के आदान-प्रदान पर बातचीत की। इसके साथ ही दोनों पक्षों के बीच आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान (रिसर्च) सहयोग स्थापित करने तथा दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारी की असीम संभावनाओं पर बेहद विस्तृत और सकारात्मक चर्चा हुई।
पांच वर्षों में पचास हजार कुशल भारतीयों को मिलेंगे रोजगार
यह यात्रा मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) जैसे आधुनिक उद्योगों के लिए कुशल भारतीय इंजीनियर्स तैयार करने के उद्देश्य से की गई। यह पहल जापान सरकार के उस मेगा प्लान का हिस्सा है, जिसके तहत आगामी पांच वर्षों में पचास हजार कुशल भारतीय पेशेवरों को जापान में काम करने के बेहतरीन अवसर दिए जाने हैं।
इस बैठक के दौरान जे.सी. बोस विश्वविद्यालय ने आधिकारिक रूप से उनके सामने एक खास ‘सेतु’ (स्ट्रैटेजिक एक्सचेंज फॉर टैलेंट एंड यूनिवर्सिटी कोलैबोरेशन) का प्रस्ताव रखा। इस रणनीतिक पहल के माध्यम से विश्वविद्यालय खुद को हरियाणा राज्य के भीतर जापानी औद्योगिक सहयोग और तकनीकी विकास के एक बड़े मुख्य केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहता है।
तीन चरणीय मॉडल से प्रतिभाओं को सीधे जापान से जोड़ेगा संस्थान
इस नई परिकल्पना के तहत राज्य में जापानी भाषा और संस्कृति संवर्धन, बड़े उद्योगों के साथ सीधा सहयोग, स्टार्टअप इनक्यूबेशन, पेड इंटर्नशिप तथा फाइनल प्लेसमेंट को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे हरियाणा के होनहार छात्रों और प्रोफेसरों को जापान के शीर्ष तकनीकी संस्थानों और वैश्विक विनिर्माण कंपनियों के साथ सीधे काम करने का बड़ा मौका मिलेगा।
साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक सुव्यवस्थित तीन-चरणीय प्रतिभा विकास (टैलेंट डेवलपमेंट) मॉडल भी पेश किया। इसमें पहले चरण में ग्लोबल इंटर्नशिप, दूसरे चरण में जापानी कॉर्पोरेट नेटवर्किंग व भर्ती और तीसरे चरण में परमानेंट रोजगार सुनिश्चित करने की योजना है। यह अनूठा मॉडल भारत सरकार के कुशल युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार देने के राष्ट्रीय विजन को काफी मजबूत करेगा।

