हिमाचल बोर्ड परीक्षा में कॉपियां बदलने का सनसनीखेज खुलासा, क्या फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद बदलेंगे 10वीं के नतीजे?

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा प्रणाली में एक बहुत बड़ी सुरक्षा चूक का मामला सामने आया है। फॉरेंसिक जांच टीम ने इस बात की पुष्टि की है कि बोर्ड की परीक्षाओं के दौरान छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं के साथ जानबूझकर अवैध छेड़छाड़ की गई थी।

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बोर्ड प्रशासन ने इस गंभीर गड़बड़ी पर कड़ा संज्ञान लेते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही प्रभावित हो रहे बेकसूर छात्रों के शैक्षणिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए बोर्ड ने एक बड़ा फैसला लिया है, जिसके तहत उन्हें अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे।

बिलासपुर के परीक्षा केंद्र पर उत्तर पुस्तिकाओं से हेरफेर

बोर्ड के अध्यक्ष राजेश शर्मा ने बताया कि यह आपराधिक छेड़छाड़ बिलासपुर जिले के झंडुत्ता स्थित सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल परीक्षा केंद्र पर हुई थी। इस विशेष केंद्र पर करीब 40 परीक्षार्थियों ने मैट्रिक की परीक्षा दी थी, जिसमें जेओरा स्कूल के 11 छात्र भी शामिल थे।

यह मामला तब प्रकाश में आया जब आर्ट्स विषय की परीक्षा देने वाले 9 छात्र खुद शिकायत लेकर बोर्ड मुख्यालय पहुंचे थे। इन पीड़ित छात्रों ने लिखित आवेदन देकर अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के ‘मल्टीपल चॉइस क्वेश्चन’ यानी एमसीक्यू वाले भाग में अवैध बदलाव करने का आरोप लगाया था।

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फॉरेंसिक लैब की जांच में सच आया सामने

गंभीर शिकायत मिलते ही प्रशासन ने छात्रों को तुरंत धर्मशाला बुलाया और विषय विशेषज्ञों के सामने उनकी प्रतियों की दोबारा री-चेकिंग करवाई। संदेह गहराने पर कॉपियों को धर्मशाला स्थित क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया, जहां रासायनिक जांच में उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ की पुष्टि हो गई।

बोर्ड द्वारा गठित विशेष जांच समिति को छानबीन के दौरान एक और चौंकाने वाली वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ी का पता चला। परीक्षा केंद्र से आई उत्तर पुस्तिकाओं वाले सुरक्षित लिफाफों के सीरियल नंबर मुख्य पैकिंग मेमो में दर्ज मूल नंबरों से बिल्कुल भी मेल नहीं खा रहे थे।

मासूम छात्रों को बोर्ड देगा कंपंसेटरी मार्क्स

इस मिलान के फेल होने से यह साफ हो गया कि लिफाफों की अदला-बदली या तो परीक्षा केंद्र पर ही हुई या फिर पार्सल ले जाते समय रास्ते में की गई। बोर्ड ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में परीक्षा दे रहे मासूम बच्चों की कोई गलती नहीं है।

बोर्ड ने छात्रों के भविष्य को बचाने के लिए नियमों के तहत उन सभी विवादित प्रश्नों के लिए कंपंसेटरी मार्क्स देने का निर्णय लिया है। इससे परीक्षा परिणाम पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा और बच्चों की आगे की पढ़ाई का रास्ता पूरी तरह सुरक्षित और साफ रहेगा।

Author: Sunita Gupta

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