California News: अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक संघीय अदालत ने एलन मस्क को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने ओपनएआई (OpenAI) और उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैम ऑल्टमैन के खिलाफ मस्क का दायर मुकदमा खारिज कर दिया है। जूरी ने पाया कि दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति मस्क ने यह कानूनी मामला दायर करने में काफी देरी कर दी थी।
अदालत की नौ सदस्यीय जूरी ने मुकदमा खारिज करने की सिफारिश की थी। न्यायाधीश यवोन गोंजालेज रोजर्स ने इस महत्वपूर्ण फैसले को अदालत का अंतिम निर्णय मानते हुए अपनी मंजूरी दे दी। अदालत ने माना कि मस्क ने स्टैच्यूट ऑफ लिमिटेशन्स यानी मुकदमा दायर करने की तय समय सीमा को बहुत पहले ही पार कर लिया था।
सैम ऑल्टमैन पर मस्क ने लगाया था बड़ा आरोप
एलन मस्क ने सैम ऑल्टमैन और उनके बड़े सहयोगियों पर सीधा धोखा देने का गंभीर आरोप लगाया था। आपको बता दें कि मस्क खुद भी इस चर्चित कंपनी के सह-संस्थापक रह चुके हैं। इस एआई कंपनी की शुरुआत साल 2015 में हुई थी। इसके शुरुआती समय में मस्क ने लगभग 38 मिलियन डॉलर का भारी निवेश किया था।
बाद में इसी कंपनी ने मशहूर चैटबॉट चैटजीपीटी (ChatGPT) का निर्माण किया। कैलिफोर्निया के ओकलैंड में 27 अप्रैल को इस बहुचर्चित मुकदमे की शुरुआत हुई थी। इस अहम कानूनी लड़ाई ने सिलिकॉन वैली के इन दो बड़े दिग्गजों के बीच चल रही कड़वी अनबन और कंपनी की पुरानी सच्चाई को दुनिया के सामने पूरी तरह लाकर रख दिया।
आज के समय में ओपनएआई 852 अरब डॉलर से ज्यादा की अनुमानित कीमत वाली विशाल कंपनी बन चुकी है। यह कंपनी इतिहास के सबसे बड़े ‘इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग’ की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रही है। लेकिन ऑल्टमैन और उनकी कंपनी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कंपनी को हमेशा गैर-लाभकारी संस्था बनाए रखने का कोई वादा नहीं किया था।
मस्क की कंपनी पर एकतरफा नियंत्रण की थी मंशा
ऑल्टमैन ने तर्क दिया कि मस्क सच्चाई जानते थे। मस्क ने यह मुकदमा केवल इसलिए दायर किया क्योंकि वे इस तेजी से बढ़ती एआई कंपनी पर अपना नियंत्रण नहीं रख पा रहे थे। मस्क चाहते थे कि ऑल्टमैन को कंपनी के बोर्ड से तुरंत हटा दिया जाए। फंडिंग रोकने के मस्क के फैसले ने उनके बीच गहरी दरार पैदा की।
मस्क का कहना था कि वे कंपनी के भ्रामक आचरण पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे। साल 2023 में ओपनएआई के बोर्ड ने ऑल्टमैन को कुछ समय के लिए सीईओ पद से अचानक हटा दिया था। हालांकि, कुछ ही दिनों के बाद ऑल्टमैन को उनका पद वापस मिल गया था। इस घटना ने पूरे टेक जगत को चौंका दिया था।
इस मुकदमे की सुनवाई पूरे तीन हफ्ते तक चली थी। इस दौरान मस्क, ऑल्टमैन और शीर्ष सहयोगी ग्रेग ब्रॉकमैन ने अहम गवाही दी। इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला और टेक जगत के कई अन्य बड़े दिग्गजों ने गवाही के लिए कोर्ट में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इन सभी ने अदालत में अपना स्पष्ट पक्ष रखा।
मस्क और ऑल्टमैन के बीच सीईओ पद की थी होड़
मस्क ने अपनी गवाही में जूरी को बताया कि विपक्षी लोग इस मुकदमे को जटिल बनाने की कोशिश करेंगे। मस्क के अनुसार मामला बहुत सरल था कि किसी चैरिटी को हड़पना बिल्कुल ठीक नहीं है। मस्क ने यह भी दावा किया कि ऑल्टमैन और ब्रॉकमैन ने कंपनी की वैल्यूएशन में जबरदस्त उछाल लाकर खुद को गलत तरीके से अमीर बनाया।
मुकदमे के दौरान ब्रॉकमैन ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि ओपनएआई में उनकी हिस्सेदारी की कुल कीमत लगभग 30 बिलियन डॉलर है। वहीं कंपनी ने मस्क के सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए तुरंत खारिज कर दिया था। कंपनी का कहना था कि मस्क का असली मकसद कंपनी की तेजी से हो रही शानदार तरक्की को किसी तरह रोकना है।
कंपनी ने आरोप लगाया कि मस्क 2023 में लॉन्च हुई अपनी नई कंपनी एक्सएआई को बढ़ावा देना चाहते हैं। शुरुआती दिनों में ऑल्टमैन और मस्क दोनों ही कंपनी के सीईओ बनना चाहते थे। ऑल्टमैन ने अदालत को बताया कि उन्हें मस्क की उन तमाम कोशिशों से बहुत चिंता थी, जिनके जरिए वह ओपनएआई पर ज्यादा से ज्यादा नियंत्रण चाहते थे।
ऑल्टमैन ने एलन मस्क पर लगाया बड़ा आरोप
ओपनएआई का मुख्य मकसद सुरक्षित तरीके से एक ऐसी एआई तकनीक विकसित करना था जो इंसानों से ज्यादा काबिल हो। इसे ही आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस कहा जाता है। ऑल्टमैन ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कंपनी की शुरुआत इसलिए की थी क्योंकि उन्हें लगता था कि इस तकनीक पर किसी एक व्यक्ति का एकाधिकार या पूरा नियंत्रण बिल्कुल नहीं होना चाहिए।
गवाही के अंत में ऑल्टमैन ने कहा कि हालात खराब होने से पहले वह एलन मस्क की बहुत ज्यादा इज्जत करते थे। लेकिन उन्हें महसूस हुआ कि मस्क ने उन्हें बीच मझधार में अकेला छोड़ दिया। मस्क ने वादे पूरे नहीं किए और कंपनी को बहुत मुश्किल हालात में डालकर किनारा कर लिया। उन्होंने सरेआम हम पर हमले जारी रखे।
Author: Pallavi Sharma


