Pyongyang News: उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने संसद में एक ऐसा भाषण दिया है, जिसने दुनिया भर के सुरक्षा विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। उन्होंने साफ कर दिया है कि उत्तर कोरिया अपनी परमाणु सेना को अब अनंत काल तक और भी ज्यादा शक्तिशाली बनाएगा। किम ने दक्षिण कोरिया को अपना सबसे बड़ा और ‘स्थायी दुश्मन’ घोषित कर इस विवाद को एक नए और खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है।
सुप्रीम पीपुल्स असेंबली को संबोधित करते हुए किम जोंग उन ने सोमवार को कहा कि परमाणु हथियार ही उनके देश की सुरक्षा की असली ढाल हैं। उनका मानना है कि इन घातक हथियारों की वजह से ही युद्ध रुका हुआ है। अब उत्तर कोरिया अपना पूरा ध्यान आर्थिक तरक्की, गगनचुंबी निर्माण कार्यों और अपने नागरिकों के जीवन स्तर को सुधारने पर केंद्रित करेगा।
किम जोंग उन ने अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने की बात कही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर किसी ने भी उत्तर कोरिया की सीमाओं का उल्लंघन किया, तो उसे बिना किसी हिचकिचाहट के बेरहमी से जवाब दिया जाएगा। इसी इरादे को पुख्ता करने के लिए 2026 के बजट में रक्षा खर्च को कुल व्यय का 15.8 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है।
परमाणु निरस्त्रीकरण की बातों को किया सिरे से खारिज
किम ने उन तमाम प्रस्तावों को कचरे के डिब्बे में डाल दिया है, जिनमें परमाणु हथियार छोड़ने के बदले आर्थिक मदद की पेशकश की जाती थी। उन्होंने इसे देश की ‘सही रणनीतिक पसंद’ बताया है। उत्तर कोरिया अब अपनी ऊर्जा का बड़ा हिस्सा आर्थिक विकास और बिजली उत्पादन बढ़ाने पर लगाएगा, लेकिन अपनी परमाणु ताकत की कीमत पर बिल्कुल नहीं।
सियोल के साथ दशकों पुरानी ‘पुनर्मिलन’ की शांतिपूर्ण नीति को भी किम ने अब आधिकारिक तौर पर दफन कर दिया है। दक्षिण कोरिया अब उनके लिए केवल एक पड़ोसी नहीं, बल्कि सबसे बड़ा दुश्मन राज्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों को अब देश के कानून का हिस्सा बना दिया गया है, जिससे कोरियाई प्रायद्वीप में शांति की उम्मीदें धुंधली हो गई हैं।
किम जोंग उन ने एक नई पंचवर्षीय विकास योजना भी पेश की है। इस योजना के तहत उद्योगों का आधुनिकीकरण किया जाएगा और देश भर में बड़े पैमाने पर आवास निर्माण कार्य होंगे। बिजली और कोयले के उत्पादन को बढ़ाने के लिए भारी निवेश का खाका तैयार किया गया है, ताकि देश आत्मनिर्भर बन सके।
पुतिन का मिला साथ, मजबूत हुई रणनीतिक साझेदारी
इस महत्वपूर्ण संसदीय सत्र के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का बधाई संदेश भी पढ़कर सुनाया गया। पुतिन ने मॉस्को और प्योंगयांग के बीच रणनीतिक साझेदारी को और भी मजबूत करने का संकल्प जताया। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब उत्तर कोरिया वैश्विक प्रतिबंधों के बीच रूस के करीब जा रहा है।
परमाणु युद्ध लड़ने की क्षमताओं के विस्तार के लिए अलग से विशेष फंड आवंटित किए गए हैं। संविधान में जरूरी संशोधन कर नई आर्थिक योजनाओं को कानूनी मंजूरी दे दी गई है। किम जोंग उन का यह कड़ा रुख दिखाता है कि वह अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने के बजाय अपनी सैन्य ताकत को और अधिक धार देने के मूड में हैं।
कोरियाई प्रायद्वीप पर बढ़ता यह तनाव वैश्विक राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है। जहां एक तरफ आर्थिक विकास के वादे हैं, वहीं दूसरी तरफ परमाणु हथियारों का बढ़ता जखीरा। किम जोंग उन ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि उनकी शर्तों के बिना अब कोई समझौता मुमकिन नहीं है।


