हिमाचल के जनजातीय इलाकों के बजट पर बड़ा बवाल, 972 करोड़ से 302 करोड़ पर क्यों आई बात?

Himachal News: हिमाचल प्रदेश की राजनीति में बजट कटौती को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। सुक्खू सरकार पर जनजातीय क्षेत्रों की अनदेखी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। राज्य के पूर्व मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने दावा किया है कि जनजातीय इलाकों के विकास बजट में भारी कमी की गई है। इस बड़ी कटौती के कारण इन पहाड़ी क्षेत्रों का विकास पूरी तरह ठप हो गया है।

972 करोड़ से घटाकर मात्र 302 करोड़ किया गया बजट

पूर्व मंत्री रामलाल मारकंडा ने बजट के आंकड़ों को लेकर चौंकाने वाले दावे किए हैं। उन्होंने बताया कि पहले हर साल जनजातीय क्षेत्रों के लिए करीब नौ प्रतिशत बजट मिलता था। वर्तमान सरकार ने इसे घटाकर लगभग चार प्रतिशत कर दिया है। पहले इन विशेष क्षेत्रों को विकास के लिए 972 करोड़ रुपये मिलते थे। अब यह राशि घटकर सिर्फ 302 करोड़ रुपये रह गई है। इस कटौती का सीधा असर क्षेत्र की विकास योजनाओं पर पड़ रहा है।

लाहौल घाटी की प्रमुख विकास योजनाओं का पैसा हुआ गायब

बजट की इस कमी के कारण कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों पर सीधा ब्रेक लग गया है। मारकंडा ने आरोप लगाया कि पुरानी कई बड़ी योजनाओं का पैसा अब दूसरी जगह डायवर्ट कर दिया गया है। उनके कार्यकाल में लाहौल घाटी में कोल्ड स्टोर के लिए साढ़े तीन करोड़ रुपये मिले थे। इसके साथ ही सब्जी मंडी कारगा के लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान हुआ था। वर्तमान में इन अहम योजनाओं का सरकारी रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है।

राज्य के हिस्से की कमी से लैप्स हुई केंद्र की बड़ी योजना

कांग्रेस सरकार पर केवल राज्य के बजट को ही नहीं बल्कि केंद्र की योजनाओं को भी अटकाने का आरोप है। पूर्व मंत्री ने बताया कि केंद्र के जनजातीय मंत्रालय ने दस करोड़ रुपये की बड़ी योजना स्वीकृत की थी। इसमें राज्य सरकार को अपना दस प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य रूप से देना था। राज्य सरकार ने अपना हिस्सा नहीं दिया और मार्च में यह पूरी राशि लैप्स हो गई। इससे जनजातीय क्षेत्र के विकास को बड़ा झटका लगा है।

सरकार पर लोगों को गुमराह करने का लगाया सीधा आरोप

डॉ. मारकंडा ने कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली पर बहुत गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार जनजातीय क्षेत्रों के विकास के नाम पर केवल खोखले दावे कर रही है। जमीनी स्तर पर इन क्षेत्रों के हालात बिल्कुल अलग और खराब हैं। सरकार विकास का झुनझुना पकड़ा कर भोली-भाली जनता को सिर्फ गुमराह कर रही है। असली योजनाओं का सीधा लाभ सही लोगों और सही जगह तक बिल्कुल नहीं पहुंच पा रहा है।

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