दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं पर कैग रिपोर्ट का खुलासा: 70 फीसदी मरीजों को मिल रहा एक मिनट से भी कम का परामर्श

New Delhi News: दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और विस्तार को लेकर कैग रिपोर्ट में गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। सोमवार को विधानसभा में प्रस्तुत नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक रिपोर्ट-2024 के अनुसार, दिल्ली सरकार आवंटित स्वास्थ्य बजट को पूरा खर्च नहीं कर पा रही है। 2016 से 2023 के बीच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण के लिए आवंटित 35.16 करोड़ रुपये में से मात्र 9.78 करोड़ यानी 28 प्रतिशत ही खर्च किया जा सका। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि दिल्ली सरकार के अस्पतालों में 70 प्रतिशत मरीजों को एक मिनट से भी कम का चिकित्सीय परामर्श मिल रहा है।

आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक की धीमी प्रगति

कैग रिपोर्ट मेंआम आदमी मोहल्ला क्लीनिक योजना की धीमी प्रगति भी सामने आई है। 1000 क्लीनिक के लक्ष्य के मुकाबले मार्च 2023 तक केवल 523 ही स्थापित हो सके थे। वर्ष 2020 के बाद मात्र 38 नए क्लीनिक शुरू हुए। कई क्लीनिक चिकित्सकों की कमी के कारण 15 दिन से लेकर 23 महीने तक बंद रहे। 74 क्लीनिकों में आवश्यक 165 दवाओं की पूरी उपलब्धता नहीं थी। बुनियादी उपकरणों की भी कमी पाई गई। अक्टूबर 2022 से मार्च 2023 के बीच 70 प्रतिशत मरीजों को चिकित्सक से एक मिनट से भी कम समय मिला, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठते हैं।

स्कूल स्वास्थ्य योजना और पालीक्लिनिक भी पीछे

दिल्लीमें मोबाइल स्वास्थ्य योजना और स्कूल स्वास्थ्य योजना भी लक्ष्य से पीछे रहीं। स्कूल स्वास्थ्य योजना के तहत 17 लाख बच्चों में से केवल 2.81 से 3.51 लाख बच्चों तक ही सेवाएं पहुंच सकीं। 150 पालीक्लिनिक स्थापित करने के लक्ष्य के सापेक्ष 2018-19 तक केवल 28 ही चालू हो सके। डिस्पेंसरी में चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों की भी भारी कमी पाई गई। रिपोर्ट में दवा भंडारण की खराब स्थिति भी सामने आई। दवाओं को फर्श, शौचालय परिसर और सीढ़ियों पर रखा गया था। आयुष डिस्पेंसरी में भी बुनियादी सुविधाओं और दवाओं की कमी पाई गई, जिससे वहां ओपीडी मरीजों की संख्या में कमी आई।

योजना और निगरानी में गंभीर खामियां

कैग रिपोर्ट-2024 सेस्पष्ट है कि दिल्ली की प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था में योजना, क्रियान्वयन और निगरानी के स्तर पर गंभीर खामियां बनी हुई हैं। आवंटित बजट का पूरा उपयोग न होना, चिकित्सकों की कमी, दवाओं की अनुपलब्धता और मरीजों को अपर्याप्त परामर्श मिलना स्वास्थ्य सेवाओं की खराब गुणवत्ता को दर्शाता है। रिपोर्ट में इन खामियों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग को अब इन मुद्दों पर गंभीरता से काम करना होगा ताकि राजधानी के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

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