Delhi News: खान-पान की गलत आदतों से पाचन तंत्र बिगड़ना आम है। अक्सर लोग कब्ज की समस्याओं को बवासीर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन एनल फिशर और फिस्टुला दो अलग स्थितियां हैं। VNA हॉस्पिटल, दिल्ली के यूरोलॉजी हेड डॉ. विनीत मल्होत्रा के अनुसार, इनकी सही पहचान ही सही इलाज की पहली शर्त है।
एनल फिशर गुदा मार्ग की त्वचा में आई एक दरार है। जब मल त्याग के समय तेज दबाव पड़ता है, तो यह नाजुक परत फट जाती है। जिन लोगों को पुरानी कब्ज की शिकायत रहती है, उनमें यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। शौच के दौरान कांच चुभने जैसा दर्द और खून आना इसके मुख्य लक्षण हैं।
वहीं, एनल फिस्टुला को भगंदर भी कहते हैं। यह गुदा के अंदर की ग्रंथि और बाहरी त्वचा के बीच बनी एक असामान्य सुरंग है। यह अक्सर किसी पुराने फोड़े या संक्रमण के बाद विकसित होता है। बार-बार मवाद निकलना, दर्द और बुखार इसके प्रमुख संकेत हैं। इसे शुरुआती दौर में पहचानना बेहद जरूरी होता है।
इलाज में क्या है अंतर?
डॉ. विनीत मल्होत्रा बताते हैं कि फिशर के शुरुआती मामलों में सर्जरी की जरूरत कम पड़ती है। फाइबर युक्त आहार, पर्याप्त पानी और सिट्ज बाथ से काफी राहत मिल सकती है। इसके उलट, फिस्टुला का इलाज अक्सर सर्जरी से ही होता है। लेजर तकनीक और फिस्टुलोटॉमी के जरिए इस संक्रमित सुरंग को पूरी तरह साफ किया जाता है।
मल त्याग के समय दर्द, खून आना या मवाद निकलने की स्थिति में बिल्कुल देरी न करें। इन बीमारियों को नजरअंदाज करना गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच करवाकर ही सही दिशा में उपचार शुरू करें। सही समय पर लिया गया चिकित्सकीय परामर्श आपको भविष्य की बड़ी परेशानियों से बचा सकता है।
Author: Asha Thakur


