Critical Minerals: लिथियम-कोबाल्ट की नीलामी में कंपनियों ने मोड़ा मुंह, अब ‘मास्टरप्लान’ बदलने की तैयारी में मोदी सरकार

India News: भारत सरकार भविष्य के ईंधन कहे जाने वाले ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ की खोज और नीलामी को लेकर अपनी रणनीति में बड़ा फेरबदल करने जा रही है। हाल ही में हुई नीलामियों में निजी कंपनियों की बेहद कम दिलचस्पी ने खान मंत्रालय की चिंता बढ़ा दी है। वर्ष 2023-24 में घोषित 48 ब्लॉकों में से केवल 24 की ही सफल नीलामी हो सकी। यानी करीब 50 फीसदी ब्लॉक बोलीदाताओं की कमी के कारण लटक गए। अब सरकार इस प्रक्रिया को और अधिक आकर्षक और निवेशकों के अनुकूल बनाने के लिए नीतिगत संशोधनों पर काम कर रही है।

नीलामी में फ्लॉप शो और निवेशकों की बेरुखी की वजह

हाल ही में छठे चरण के तहत घोषित 11 ब्लॉकों की नीलामी रद्द करनी पड़ी क्योंकि पर्याप्त योग्य बोलीदाता नहीं मिले। पांच ब्लॉकों में तो एक भी बोली नहीं आई। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यावरणीय मंजूरी में देरी, बुनियादी ढांचे की कमी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध सस्ते आयात के विकल्पों ने कंपनियों का उत्साह ठंडा कर दिया है। इसे देखते हुए खान मंत्रालय अब टैक्स छूट, सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और बेहतर इंसेंटिव जैसे प्रावधानों को नीति में शामिल कर सकता है। फिलहाल सातवें चरण में 19 नए ब्लॉकों की प्रक्रिया शुरू की गई है।

चीन के दबदबे को चुनौती और वैश्विक समीकरण

दुनिया भर में लिथियम, निकल और कोबाल्ट जैसे खनिजों के लिए होड़ मची है क्योंकि ये इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और रक्षा उद्योग के लिए रीढ़ हैं। वर्तमान में चीन इन दुर्लभ खनिजों के 80-90 फीसदी प्रसंस्करण को नियंत्रित करता है। इस दबदबे को कम करने के लिए भारत अब अमेरिका के नेतृत्व वाले 54 देशों के ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टोरियल’ ब्लॉक का सक्रिय हिस्सा बन गया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए सहयोग पर जोर दिया है। भारत अब ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देशों के साथ भी द्विपक्षीय समझौते कर रहा है।

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