Punjab News: ऑनलाइन होटल बुकिंग के बाद अगर आपको कमरा न मिले तो अब परेशान होने की जरूरत नहीं है। लुधियाना स्थित जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ओयो होटल्स और दिल्ली के एक होटल पर 10,000 रुपये का तगड़ा हर्जाना लगाया है। कोर्ट ने यह फैसला बुकिंग के बावजूद कमरा न देने पर सुनाया।
बुकिंग कंफर्म होने के बाद भी होटल ने बंद किए दरवाजे
शिकायतकर्ता ने 17 से 18 जनवरी, 2023 के बीच ठहरने के लिए ओयो (OYO) ऐप के जरिए ‘होटल यतारी पैलेस’ में एक कमरा बुक किया था। ओयो की तरफ से बुकिंग आईडी भी जारी की जा चुकी थी और आंशिक भुगतान भी हो चुका था। इसके बावजूद होटल ने उन्हें एंट्री देने से साफ मना कर दिया।
पीड़ित शख्स जब देर रात करीब 1:30 बजे अपने साथियों के साथ होटल पहुंचा, तो उन्हें चेक-इन नहीं करने दिया गया। ओयो कस्टमर केयर से मिले दूसरे नंबर पर संपर्क करने के बाद भी होटल ने बुकिंग मानने से इनकार कर दिया। इस मनमानी के कारण पीड़ित को पूरी रात अपनी कार में ही गुजारनी पड़ी।
कंज्यूमर कोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार
आयोग के अध्यक्ष संजीव बत्रा और सदस्य मोनिका भगत की पीठ ने इस मामले पर बेहद सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि होटल और बुकिंग प्लेटफॉर्म की यह हरकत न केवल अनुचित व्यापार व्यवहार है, बल्कि यह हमारी महान भारतीय परंपरा ‘अतिथि देवो भव’ के भी पूरी तरह विपरीत है।
पीड़ित ने बताया कि कड़ाके की ठंड में कार में रात बिताने के बाद अगले दिन उन्हें पास के एक अन्य होटल में शरण लेनी पड़ी थी। इस मानसिक प्रताड़ना के खिलाफ जब पीड़ित ने होटल को लीगल नोटिस और ईमेल भेजे, तो उनकी तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
ओयो ने झाड़ लिया पल्ला, पर कोर्ट ने पकड़ा
इस पूरे मामले पर ओयो होटल्स ने कोर्ट में अपना बचाव करते हुए सभी आरोपों को खारिज कर दिया। कंपनी का तर्क था कि वह केवल एक तकनीकी प्लेटफॉर्म यानी ऐप संचालित करती है। कंपनी ने दावा किया कि उनके पास चेक-इन से जुड़ी किसी असुविधा की कोई औपचारिक शिकायत नहीं आई थी।
सभी सबूतों की गहन जांच के बाद उपभोक्ता आयोग ने पाया कि बुकिंग पूरी तरह वैध और कंफर्म थी। कोर्ट ने माना कि होटल के इस अड़ियल रवैये के कारण शिकायतकर्ता को न केवल भारी मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न झेलना पड़ा, बल्कि अपने करीबियों के सामने शर्मिंदा भी होना पड़ा।
अदालत ने ओयो और होटल दोनों को सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापार का दोषी पाया। कोर्ट ने आदेश दिया कि दोनों पक्ष मिलकर शिकायतकर्ता को बुकिंग के तौर पर चुकाए गए 176 रुपये वापस करें। इसके साथ ही 30 दिनों के भीतर मुआवजे के रूप में 10,000 रुपये का भुगतान किया जाए।
Author: Gurpreet Singh

