Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के फार्मा उद्योग के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी सीडीएससीओ द्वारा जारी मई महीने के ड्रग अलर्ट में राज्य की 43 दवाओं के सैंपल फेल हो गए हैं। देशभर में कुल 157 दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरीं, जिनमें हिमाचल की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है.
वर्ष 2026 के शुरुआती पांच महीनों के आंकड़े राज्य के दवा निर्माण क्षेत्र में गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। जनवरी से मई तक कुल 264 दवाओं के सैंपल फेल हो चुके हैं। इनमें जनवरी में 71, फरवरी में 73, मार्च में 76, अप्रैल में 31 और मई में 43 सैंपल शामिल हैं.
सोलन और सिरमौर जिले की फार्मा कंपनियां सबसे आगे
मई महीने की रिपोर्ट के अनुसार मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली कंपनियों में सोलन जिले की 30, सिरमौर की 11 और ऊना की दो कंपनियां शामिल हैं। राज्य दवा नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने कहा कि इन डिफॉल्टर कंपनियों के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और बाजार से स्टॉक वापस मंगाया जाएगा.
गंभीर बीमारियों की आवश्यक दवाएं भी जांच में फेल
इस रिपोर्ट में कालाअंब की एक कंपनी की विटामिन-ई दवा के लगातार तीन सैंपल फेल हुए हैं। इसके साथ ही बद्दी की मार्क लैब की किडनी रोग और विंग्स बायोटेक की कैंसर की दवा भी मानकों में फेल रही। वोजमेड फार्मा की मधुमेह और स्विस गार्नियर की ब्लड शुगर नियंत्रण करने वाली दवाओं के सैंपल भी असुरक्षित पाए गए हैं.
इनके अलावा आम लोगों द्वारा इस्तेमाल होने वाली बुखार, एलर्जी, जोड़ों के दर्द, अस्थमा और मसूड़ों की बीमारियों से जुड़ी दवाएं भी इस सूची में शामिल हैं। राज्य में लगातार घटती दवाओं की गुणवत्ता के मामलों पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं। विभाग अब इन सभी फैक्ट्रियों के निर्माण मानकों की गहन समीक्षा करने की तैयारी में है.

