Dehradun News: उत्तराखंड में मानसून ने भले ही अभी तक औपचारिक रूप से दस्तक नहीं दी है, लेकिन प्री-मानसून की लगातार हो रही तेज वर्षा ने प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के रूटों पर मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। पहाड़ों पर मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए अब श्रद्धालुओं को बेहद संभलकर आगे बढ़ने की सख्त सलाह दी गई है।
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, केदारनाथ और यमुनोत्री के पैदल मार्गों पर तीर्थयात्रियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सख्त जरूरत है। सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम तक जाने वाले 21 किलोमीटर लंबे कठिन पैदल मार्ग पर इस समय छोटे-बड़े कुल 13 ऐसे खतरनाक भूस्खलन (लैंडस्लाइड) जोन सक्रिय हैं, जहां हल्की बारिश में भी पहाड़ दरकने लगते हैं।
ठीक इसी तरह, पांच किलोमीटर लंबा यमुनोत्री पैदल मार्ग भी कई जगहों पर भूस्खलन के लिहाज से बेहद खतरनाक मोड पर पहुंच चुका है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि चारों पवित्र धामों को आपस में जोड़ने वाले विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) पर लगभग 120 डेंजर जोन पूरी तरह चिह्नित किए जा चुके हैं।
बदरीनाथ और केदारनाथ हाईवे पर सबसे ज्यादा खतरा
चारधाम रूट पर बदरीनाथ हाईवे के मुनिकीरेती से कीर्तिनगर के बीच स्थित बछेलीखाल, तीनधारा, कौड़ियाला, तोताघाटी, नरकोटा और सिरोबगड़ को सबसे ज्यादा संवेदनशील माना गया है। केदारघाटी के भीतर सोनप्रयाग से लेकर मुख्य केदारनाथ धाम तक का पूरा पथरीला क्षेत्र भूस्खलन की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील घोषित किया गया है।
मौसम खराब होने या वर्षा शुरू होते ही इस पूरे मार्ग में मुनकटिया, गौरीकुंड, जंगलचट्टी, चीरबासा, भीमबली, छोटी लिनचोली और बड़ी लिनचोली समेत सभी 13 चिह्नित स्थानों पर ऊपर से भारी पत्थर गिरने लगते हैं। दरअसल, केदारनाथ का पैदल मार्ग ऊंचे पहाड़ों और खड़ी चट्टानों को काटकर बेहद संकरा बनाया गया है।
खड़ी चट्टानें होने की वजह से पहाड़ के ऊपरी हिस्से से गिरने वाले भारी बोल्डर और नुकीले पत्थर सीधे बहुत तेज रफ्तार से नीचे आते हैं। कई बार पैदल चल रहे यात्रियों को संभलने या छिपने तक का मौका नहीं मिल पाता। रुद्रप्रयाग के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी एनएस रजवार ने इस स्थिति पर चिंता जताई है।
प्रशासन के मुस्तैद सुरक्षा प्रयास भी पड़ रहे बौने
आपदा प्रबंधन अधिकारी के अनुसार, देश भर से आने वाले यात्रियों की सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस, एसडीआरएफ (SDRF) और डीडीआरएफ की टीमें यात्रा मार्ग पर चौबीसों घंटे तैनात रहती हैं। लेकिन प्राकृतिक आपदाओं और अचानक दरकते पहाड़ों के आगे कई बार प्रशासन के यह सुरक्षा प्रयास भी बिल्कुल बौने साबित हो जाते हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, 76 किलोमीटर लंबे गौरीकुंड हाईवे पर रुद्रप्रयाग से सोनप्रयाग के बीच ही 13 सक्रिय भूस्खलन जोन यात्रियों के लिए काल बने हुए हैं। इसके अलावा बदरीनाथ हाईवे पर भी वैसे तो कई डेंजर जोन हैं, लेकिन हालिया वर्षा में कमेड़ा, चडुवापीपल और परथाडीप नंदप्रयाग जैसी जगहों पर खतरा दोगुना हो गया है।
इसके अलावा मैठाणा, भनेरपानी, पातालगंगा, पागलनाला, लामबगड़ और कंचनगंगा समेत कुल 11 स्थानों पर सक्रिय हुए भूस्खलन जोन इस यात्रा में बड़ी चुनौती बन सकते हैं। हालात कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भनेरपानी में शुक्रवार रात अचानक बोल्डर गिरने से एक महिला यात्री की दर्दनाक मौत हो चुकी है।
Harish Rawat


