रसोई का बजट हुआ बेपटरी: 15 दिनों में 40% तक महंगी हुईं सब्जियां और फल, आम आदमी की थाली से गायब हुआ स्वाद

Business News: देश में लगातार बढ़ते ट्रांसपोर्ट खर्च और पेट्रोल-डीजल के ऊंचे दामों का सीधा असर अब आम आदमी की रसोई पर दिखने लगा है। पिछले महज 15 दिनों के भीतर ही स्थानीय खुदरा बाजारों में हरी सब्जियों और मौसमी फलों की कीमतों में 20 से 40 फीसदी तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

भीषण गर्मी के कारण खेतों में खड़ी और मंडियों में रखी सब्जियों को भारी नुकसान हो रहा है, जिससे बाजार में इनकी आवक कम हो गई है। थोक मंडी और स्थानीय खुदरा बाजारों में टमाटर, प्याज, नींबू, हरी मिर्च और मौसमी फलों के दामों में सबसे ज्यादा उछाल देखने को मिल रहा है।

डीजल की महंगाई से बढ़ा ट्रकों का मालभाड़ा

बाहरी राज्यों से आने वाली सब्जियों और फलों की खेप में काफी गिरावट आई है। डीजल की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि के कारण ट्रकों का भाड़ा 18-20 हजार रुपये से बढ़कर सीधे 25 हजार रुपये प्रति चक्कर तक पहुंच गया है। इस बढ़ी हुई परिवहन लागत का सीधा बोझ खुदरा ग्राहकों पर पड़ रहा है।

अनाज से लेकर फल-सब्जियों के दाम आसमान छूने से मध्यम और मजदूर वर्ग के परिवारों का घरेलू बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। रसोई का खर्च बेकाबू होने से गृहणियां बेहद परेशान हैं। लोगों का कहना है कि अब राशन और सब्जियों के लिए पहले के मुकाबले दोगुनी रकम खर्च करनी पड़ रही है।

सोयाबीन तेल और मसालों की कीमतों में भी भारी उछाल

बाजार में आटा, दाल, मसाले और अन्य जरूरी सामान के दाम पहले की तुलना में काफी बढ़ गए हैं। कृषि मंडी समिति के सब्जी व फल आढ़ती मोहसिन ने बताया कि परिवहन लागत और कच्चे माल की महंगाई ही इस चौतरफा बढ़ोतरी का सबसे प्रमुख और बड़ा कारण बनकर उभरी है।

मंडी आढ़ती के अनुसार, कुछ समय पहले तक जो सोयाबीन खाद्य तेल 130 रुपये प्रति लीटर की दर पर बिक रहा था, उसकी कीमत अब बढ़कर 180 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुकी है। लहसुन और नींबू जैसी रोजमर्रा की बेहद जरूरी चीजें भी आम उपभोक्ताओं की पहुंच से दूर होती जा रही हैं।

बाजार में सब्जियों की कीमतों का तुलनात्मक विवरण

पिछले 15 दिनों में खुदरा बाजार में सब्जियों के दामों में आए बड़े बदलाव को इस तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है: सब्जी का नाम 15 दिन पहले का रेट (प्रति किलो) वर्तमान का रेट (प्रति किलो) लहसुन 120 रुपये 200 रुपये नींबू 50 रुपये 80 रुपये पलवल 60 रुपये 80 रुपये करेला 40 रुपये 60 रुपये शिमला मिर्च 30 रुपये 55 रुपये घीया 30 रुपये 45 रुपये खीरा 30 रुपये 50 रुपये हरी मिर्च 30 रुपये 50 रुपये तोरई 40 रुपये 50 रुपये पीला पेठा 40 रुपये 50 रुपये प्याज 100 रुपये में 5 किलो 100 रुपये में ढाई किलो

इस तालिका से साफ है कि हर छोटी-बड़ी सब्जी के दाम लगभग डेढ़ से दो गुना तक बढ़ चुके हैं। कारोबारियों का मानना है कि जब तक ईंधन के दामों में कमी नहीं आती या फिर मौसम अनुकूल नहीं होता, तब तक आम जनता को इस महंगाई से राहत मिलने के आसार बेहद कम हैं।

Author: Rajesh Kumar

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