National News: भारतीय रेलवे ने अपने नेटवर्क को आधुनिक बनाने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला किया है। रेलवे अब स्टील गर्डर वाले रेल पुलों पर पारंपरिक कंक्रीट या लकड़ी के स्लीपरों का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करेगी। इनकी जगह विशेष रूप से तैयार कंपोजिट स्लीपर्स लगाए जाएंगे।
यह नए हाईटेक स्लीपर रीसायकल प्लास्टिक, रबर और अन्य मजबूत सिंथेटिक चीजों के मिश्रण से तैयार किए जाते हैं। इस बड़े बदलाव के बाद अब यात्री ट्रेनें 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पुल पार कर सकेंगी। वहीं मालगाड़ियों को 100 की गति से चलाने की अनुमति मिलेगी।
पुराने स्लीपरों की कमियों को दूर करेगी नई तकनीक
रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक अनुराग कुमार ने चार जून को सभी रेल जोन से रिपोर्ट मांगी है। पहले फेज में देश के सबसे व्यस्त और संवेदनशील पुलों की सूची तैयार की जा रही है। वर्तमान में स्टील के पुलों पर कंक्रीट स्लीपर ट्रेनों के भारी कंपन को पूरी तरह सोख नहीं पाते थे।
पारंपरिक कंक्रीट स्लीपरों के कारण रेल पटरियों और पुलों के पूरे ढांचे पर बहुत भारी दबाव पड़ता था। इसके अलावा पुराने जमाने के लकड़ी के स्लीपर मौसम की मार और दीमक के कारण बहुत जल्दी सड़ जाते थे। इसी वजह से अनुसंधान अभिकल्प और मानक संगठन ने इस नई तकनीक को हरी झंडी दी है।
35 साल की लंबी लाइफ और ट्रैक फ्रैक्चर का खतरा खत्म
यह नए कंपोजिट स्लीपर ट्रेनों के तेज वाइब्रेशन को आसानी से सोख लेते हैं। इससे पटरियों के अचानक टूटने या ट्रैक फ्रैक्चर होने का जोखिम लगभग खत्म हो जाता है। रेलवे ने इन आधुनिक स्लीपर्स की न्यूनतम सर्विस लाइफ पूरे 35 वर्ष तय की है। यह पूरी तरह आग प्रतिरोधी भी हैं।
इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए प्रशासन ने चार घरेलू वेंडर्स को शार्टलिस्ट किया है। यह सभी कंपनियां जापान और लंदन के वैश्विक तकनीकी दिग्गजों के साथ मिलकर काम कर रही हैं। इसमें सोनीपत की स्टार ट्रैक, कोलकाता की गणपति इंडस्ट्रीज, लखनऊ की अवध रेल और पठानकोट की सिकट इंडिया शामिल हैं।
शुरुआती खेप की कड़ी जांच करेगा आरडीएसओ विभाग
कंपनियों द्वारा सप्लाई किए जाने वाले शुरुआती 100 स्लीपर्स का कड़ा निरीक्षण स्वयं आरडीएसओ की टीम करेगी। इसके बाद ही इन्हें रेलवे ट्रैक पर अंतिम रूप से उतारा जाएगा। सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा रेलवे की हमेशा से सर्वोच्च प्राथमिकता रही है।
दारागंज-झूंसी नए गंगा रेल पुल के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर विनय अग्रवाल ने बताया कि पारंपरिक स्लीपरों को बदलना एक तकनीकी क्रांति है। इससे बिना स्पीड कम किए पुल से ट्रेन चलाने का सपना साकार होगा। इन नए उपकरणों की मदद से रेलवे पुल अब बिना किसी मेंटेनेंस के सालों साल चलते रहेंगे।
Author: Pallavi Sharma


